भारत को यदि युवा देश कहा जाता है तो इसके पीछे केवल आंकड़े नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवंत शक्ति है, जो देश की दिशा और दशा बदलने की क्षमता रखती है। युवा किसी भी राष्ट्र की ऊर्जा, रचनात्मकता, साहस और परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। आज जब दुनिया तेजी से बदल रही है, तकनीक जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है और रोजगार के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन हो रहा है, तब युवाओं की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

भारत के संदर्भ में, देश की यह जनसांख्यिकीय शक्ति भारत को दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कराने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। लेकिन केवल बड़ी संख्या में युवाओं का होना पर्याप्त नहीं है। आवश्यक है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, रोजगार, स्वास्थ्य, खेल और अपनी प्रतिभा को विकसित करने के उचित अवसर उपलब्ध हों। आज का युवा केवल नौकरी पाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाला उद्यमी भी बन सकता है। स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि तकनीक, ऑनलाइन शिक्षा और नए व्यवसायों के क्षेत्र में युवाओं के लिए अनेक संभावनाएं पैदा हुई हैं। भारत के अनेक युवा अपनी प्रतिभा के बल पर देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। जरूरत है कि ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं को भी इन अवसरों से जोड़ा जाए।

हालांकि बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव, कौशल और रोजगार के बीच अंतर, नशे की समस्या, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग तथा मानसिक तनाव जैसी चुनौतियां युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं। इन समस्याओं को केवल युवाओं की जिम्मेदारी मानकर छोड़ देना उचित नहीं होगा। परिवार, शिक्षण संस्थानों, समाज और सरकार, सभी को मिलकर समाधान तलाशना होगा। नशे की समस्या युवाओं के भविष्य के लिए विशेष चिंता का विषय है। जिस उम्र में युवा अपने सपनों को आकार दे सकता है, उसी उम्र में यदि वह नशे की गिरफ्त में आ जाए तो उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार और पूरा भविष्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए नशे के खिलाफ केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं, युवाओं को खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों, कौशल विकास और सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों से जोडऩा भी आवश्यक है।

शिक्षा व्यवस्था में भी ऐसे बदलाव जरूरी हैं, जिनसे युवाओं में केवल डिग्री प्राप्त करने की प्रवृत्ति न रहे, बल्कि उनमें समस्या समाधान, नेतृत्व, संवाद, तकनीकी दक्षता और नैतिक मूल्यों का विकास हो। आज उद्योग जगत जिस प्रकार के कौशल की मांग कर रहा है, शिक्षा संस्थानों को भी उसी के अनुरूप अपने पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण को विकसित करना होगा। स्वरोजगार, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता बढ़ाना जरूरी है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में पर्यटन, बागवानी, कृषि आधारित उद्योग, हस्तशिल्प, आई.टी. और स्थानीय उत्पादों के क्षेत्र में युवाओं के लिए बड़ी संभावनाएं हैं।

लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी भी अत्यंत आवश्यक है। युवा केवल चुनाव के समय मतदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभाएं। समाज में व्याप्त कुरीतियों, भ्रष्टाचार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक असमानता जैसे विषयों पर युवाओं की सकारात्मक भागीदारी परिवर्तन का माध्यम बन सकती है। युवाओं में डिजिटल साक्षरता और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार की समझ विकसित करना समय की आवश्यकता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा अपने अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें। ईमानदारी से अपना काम करना, पर्यावरण की रक्षा, कानून का सम्मान, जरूरतमंदों की सहायता करना और समाज में सकारात्मक सोच फैलाना भी राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की भी महत्वपूर्ण शक्ति हैं। यदि युवाओं को सही दिशा, उचित अवसर और आवश्यक संसाधन मिलें तो वे भारत की विकास यात्रा को नई गति दे सकते हैं। इसलिए आज जरूरत है कि युवा नीति केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रभाव विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और गांवों तक दिखाई दे। युवाओं की आवाज सुनी जाए, उनकी प्रतिभा को अवसर मिले और उनके सपनों को पूरा करने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की जाए। भारत का विकसित और आत्मनिर्भर भविष्य मजबूत युवा शक्ति पर ही टिका है।-प्रो. मनोज डोगरा 

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