बिलासपुर– बिलासपुर के ग्राम कछार में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के प्रस्तावित कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बड़ा फैसला सुनाया है। भोपाल स्थित सेंट्रल जोनल बेंच ने जमीन आवंटन को चुनौती देने वाली निजी कंपनी की याचिका खारिज कर दी और याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया है।

बायो मेडिकल वेस्ट प्लांट के पास जमीन आवंटन पर था विवाद

निजी कंपनी ने इस आवंटन को NGT में चुनौती देते हुए दावा किया था कि उसका प्लांट रेड कैटेगरी में आता है और उसके आसपास 500 मीटर से एक किलोमीटर तक का बफर जोन होना चाहिए। कंपनी का तर्क था कि भविष्य में प्लांट का विस्तार भी किया जाना है, इसलिए उसके पास किसी अन्य प्लांट की स्थापना नहीं होनी चाहिए।

नगर निगम की ओर से अधिवक्ता अनादि शर्मा ने मामले में पैरवी की।

NGT ने कहा- CBG प्लांट व्हाइट कैटेगरी में
मामले की सुनवाई के बाद NGT ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के नियमों के अनुसार कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट व्हाइट कैटेगरी में आता है। यह जैविक कचरे से ऊर्जा तैयार करने वाला ग्रीन प्रोजेक्ट है।

ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि CPCB की बफर जोन संबंधी गाइडलाइंस मुख्य रूप से रिहायशी और संवेदनशील क्षेत्रों को प्रदूषण से बचाने के लिए हैं। दो वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट्स के बीच इस तरह का अनिवार्य बफर जोन लागू नहीं होता।

अपने ही पुराने दस्तावेज से घिरी कंपनी
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि याचिकाकर्ता कंपनी ने वर्ष 2019 में अपना अनुबंध रिन्यू कराते समय खुद दो वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट्स के बीच 10 मीटर की दूरी और ग्रीन बेल्ट को पर्याप्त बताया था।

NGT ने कंपनी के इस पुराने रुख का उल्लेख करते हुए बड़ी दूरी के बफर जोन की मौजूदा मांग पर नाराजगी जताई। ट्रिब्यूनल ने इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया।

10 एकड़ में बनेगा 100 करोड़ का CBG प्लांट
कछार में करीब 10 एकड़ जमीन पर 100 करोड़ रुपये की लागत से CBG प्लांट प्रस्तावित है। कानूनी विवाद के कारण परियोजना का काम करीब एक साल तक प्रभावित रहा।

यह परियोजना स्मार्ट सिटी मिशन 2.0 के तहत प्रस्तावित है। मार्च 2025 में इसका शिलान्यास किया गया था। BPCL ने मई 2026 में चेन्नई की एस बेरी कंपनी को निर्माण का काम सौंपा। पहली डेडलाइन पूरी होने के बाद अब मई 2027 की नई समयसीमा निर्धारित की गई है।

प्लांट में शहर के गीले और जैविक कचरे से CBG तैयार की जाएगी। प्रस्तावित प्लांट की क्षमता 7 टीपीडी बताई गई है और रोजाना करीब 150 टन जैविक कचरे को प्रोसेस करने की योजना है।

छत्तीसगढ़ के इन शहरों में भी CBG प्लांट
BPCL की योजना रायपुर, भिलाई, धमतरी, बिलासपुर और राजनांदगांव में CBG प्लांट लगाने की है।
रायपुर: 7 टीपीडी
भिलाई: 7 टीपीडी
धमतरी: 15 टीपीडी
बिलासपुर: 7 टीपीडी
राजनांदगांव: 15 टीपीडी

वहीं रायपुर और भिलाई में जमीन आवंटन के बावजूद स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों के विरोध का भी उल्लेख किया गया है। धमतरी में पहले आवंटित जमीन अनुपयुक्त पाए जाने के बाद नई जमीन की जरूरत बताई गई है।

अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा में GAIL लगाएगी प्लांट
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा में भी CBG प्लांट प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं को GAIL (India) Limited के माध्यम से विकसित किया जाना है। इन प्लांटों की प्रस्तावित क्षमता करीब 12 से 15 टीपीडी के बीच है।

NGT के फैसले के बाद बिलासपुर के कछार में लंबे समय से कानूनी अड़चन में फंसी CBG परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

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