पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी से जुड़ा कानूनी मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज तीन FIR में फिलहाल गिरफ्तारी जैसी सख्त कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अदालत ने माना कि मौजूदा स्थिति में उनसे हिरासत में पूछताछ की जरूरत नजर नहीं आती। हालांकि राहत के साथ जांच एजेंसी के सामने सहयोग करने की शर्त भी रखी गई है, जिससे मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

तीन FIR पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को तीन FIR के मामले में अंतरिम सुरक्षा दी है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत ने निर्देश दिया कि 30 नवंबर तक या अगले आदेश तक उनके खिलाफ कोई Coercive Action यानी गिरफ्तारी या इसी तरह की जबरन कार्रवाई नहीं की जाए।

अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या जांच के मौजूदा चरण में अभिषेक बनर्जी को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल ऐसी जरूरत नहीं मानी और उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दे दिया।

राहत के साथ जांच में सहयोग की शर्त

हाईकोर्ट ने साफ किया है कि कानूनी सुरक्षा का मतलब जांच से दूरी नहीं है। अभिषेक बनर्जी को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना होगा और जब अदालत के निर्देशों के मुताबिक पूछताछ के लिए बुलाया जाए, तब उपलब्ध रहना होगा।

जांच एजेंसी के लिए भी अदालत ने एक महत्वपूर्ण शर्त तय की है। अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाने से कम से कम 48 घंटे पहले नोटिस देना होगा। यानी अचानक पूछताछ या हिरासत की स्थिति पैदा करने के बजाय उन्हें पर्याप्त समय पहले सूचना देनी होगी।

हर FIR के लिए अलग मुकदमा लड़ने की जरूरत नहीं

सुनवाई के दौरान अदालत ने मुकदमों की संख्या को लेकर भी अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि FIR में कार्रवाई का आधार और कारण एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं, तो आरोपी को हर FIR के खिलाफ अलग-अलग अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर करना मुकदमों की अनावश्यक बढ़ोतरी का कारण बन सकता है।

इसी वजह से अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी को इन तीनों FIR में राहत पाने के लिए अलग-अलग याचिकाएं लेकर अदालत आने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे एक ही तरह के विवाद पर बार-बार होने वाली कानूनी कार्रवाई को सीमित करने का रास्ता साफ हुआ है।

23 नवंबर को सामने आएगी जांच की तस्वीर

अब इस मामले की अगली अहम तारीख 23 नवंबर है। उस दिन पुलिस और जांच एजेंसी को अदालत के सामने जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी। यानी अभी अदालत ने अंतिम फैसला नहीं दिया है; फिलहाल यह सुरक्षा अंतरिम प्रकृति की है।

प्रोग्रेस रिपोर्ट के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट हो सकती है। यदि जांच एजेंसी को आगे किसी तरह की कार्रवाई की जरूरत महसूस होती है, तो उसे अदालत के मौजूदा निर्देशों और प्रक्रिया का पालन करना होगा।

विदेश जाने पर भी पूरी तरह रोक नहीं

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा कर सकते हैं, लेकिन यह सुविधा सुप्रीम कोर्ट से पहले से मिली अनुमति और वहां तय शर्तों के अधीन रहेगी। इसका अर्थ है कि हाईकोर्ट के ताजा आदेश ने उनकी विदेश यात्रा को अपने स्तर पर कोई नई स्वतंत्र छूट नहीं दी है।

उन्हें पहले से लागू न्यायिक निर्देशों का पालन करना होगा और जांच में सहयोग की शर्त भी प्रभावी रहेगी।

16 FIR में से तीन पर मिली राहत

यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद मई में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कुल 16 FIR दर्ज होने की बात सामने आई थी, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश इनमें से तीन FIR से संबंधित है।

इसलिए इस आदेश को सभी मामलों में व्यापक राहत के रूप में देखना सही नहीं होगा। तीन मामलों में गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा मिली है, जबकि बाकी मामलों की स्थिति अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत तय होगी।

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