नई दिल्ली- उच्चतम न्यायालय ने पेट्रोल पंपों पर ईंधन में एथनॉल के सटीक प्रतिशत का अनिवार्य लेबल लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करने से मना कर दिया है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी। याचिका में बिलों पर मात्रा दर्ज करने और वाहनों की अनुकूलता का डेटाबेस बनाने की भी अपील की गई थी।
(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 31 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल में मौजूद एथनॉल की सटीक मात्रा अनिवार्य रूप से बतायी जाए। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस जनहित याचिका पर सुनवाई नहीं करेगी। अनुच्छेद 32 नागरिकों को सीधे उच्चतम न्यायालय का रुख करने का अधिकार देता है।
पीठ ने याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी से कहा कि वह राहत के लिए संबंधित क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। याचिका में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर हर पेट्रोल ‘डिस्पेंसिंग नोजल’ (वह नोजल/पाइप जिसके जरिए पेट्रोल वाहन की टंकी में भरा जाता है) पर एक समान और अनिवार्य रूप से लेबल लगाया जाए, जिसमें पेट्रोल में मिलाए गए एथनॉल का सटीक प्रतिशत स्पष्ट रूप से बताया जाए। केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि यह एक तरह की परोक्ष/प्रतिनिधि याचिका है, क्योंकि इसी तरह के मुद्दे से जुड़ी एक याचिका को अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है।
अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता चाहता है कि भारत सरकार उसके प्रति जवाबदेह हो।’’ गोस्वामी ने दलील दी कि उन्हें यह जानने का अधिकार है कि पेट्रोल पंपों पर उन्हें दिए जा रहे पेट्रोल में कौन-कौन से घटक और कितनी मात्रा में मौजूद हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी यह जानकारी दी जानी चाहिए कि उन्हें दिए जा रहे ईंधन में क्या-क्या शामिल है।’’ पीठ के समक्ष खुद पेश हुए गोस्वामी से न्यायालय ने कहा कि वह अपनी दलीलें उच्च न्यायालय के सामने रखें। गोस्वामी ने यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया है कि ईंधन के हर बिल पर बेचे गए पेट्रोल में एथनॉल का प्रतिशत स्पष्ट और पढ़ने योग्य तरीके से दर्ज किया जाए।
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्ष एक निश्चित समयसीमा के भीतर वाहन के हिसाब से ईंधन की अनुकूलता का एक आधिकारिक और सार्वजनिक डेटाबेस तैयार करके प्रकाशित करें। यह डेटाबेस निर्माता कंपनी, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण वर्ष के आधार पर खोजने योग्य हो तथा इसमें यह बताया जाए कि अलग-अलग वाहनों के लिए एथनॉल के विभिन्न मिश्रण उपयुक्त हैं या नहीं। याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी अनुरोध किया गया है।


