छत्तीसगढ़ की मीरा यादव ने कड़ी मेहनत करते हुए UGC NET में JRF (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) और असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता हासिल की है. थर्ड जेंडर समुदाय से आनेवाली मीरा यादव ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है, जो थर्ड जेंडर को हमेशा सिर्फ बधाई मांगने और तालियां बजाने तक सीमित समझते हैं. कभी ‘रघुवंश’ के नाम से पहचानी जाने वाली मीरा ने न केवल अपनी असली पहचान को स्वीकार किया, बल्कि UGC NET में JRF (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) और असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता हासिल कर इतिहास रच दिया है.
भरोसा बना सबसे बड़ी ताकत
वर्तमान में एलएलबी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहीं मीरा का सपना यहीं नहीं थमता, वे पीएचडी कर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली पीढ़ी के लिए एक नई राह बनाना चाहती हैं. दरअसल मीरा के इस संघर्ष भरे सफर में उनके मामा नंद कुमार, गुरुजनों और ट्रांसजेंडर कम्युनिटी की अध्यक्ष मुस्कान का अटूट सहयोग और भरोसा सबसे बड़ी ताकत बना.
मंजिल की हासिल
समाज के तानों और रूढ़िवादिता को पीछे छोड़ते हुए मीरा ने यह साबित कर दिया कि पहचान चाहे जो हो, अगर इरादे मजबूत हों तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है. मीरा की यह ऐतिहासिक सफलता सिर्फ उनकी निजी जीत नहीं, बल्कि पूरे समाज की सोच को बदलने और अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हर इंसान के हौसले की जीत है. पत्रकारों से बात करते हुए मीरा ने कहा, अम्बिकापुर के मल्टीपरपज हाई स्कूल से मैंने स्कूल तक की शिक्षा हासिल की थी. उसके बाद पीजी कॉलेज अंबिकापुर में दाखिला लिया. उन्होंने ने बताया कि वर्तमान में वे पीजी कालेज अम्बिकापुर में LLB की पढाई कर रही है. मीरा के सपने काफी बड़े हैं और अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में वो काम कर रही हैं.

