जम्मू-कश्मीर के नक्शे को लेकर भारत की स्पष्ट स्थिति सामने आने के अगले ही दिन पाकिस्तान ने एक बार फिर विवाद को हवा देने की कोशिश की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली के स्पष्टीकरण को निराधार बताते हुए आपत्ति जताई। मामला संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नक्शे को अधिक संतुलित और क्षेत्रफल के लिहाज से सटीक दिखाने से जुड़ी एक पहल के बीच उठा है, जिस पर भारत के मतदान को लेकर पड़ोसी देश ने सवाल खड़े किए हैं।
भारत के बयान के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में भारत के रुख को खारिज करने की कोशिश की। पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से संबंधित भारतीय दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है। इस प्रतिक्रिया को नई दिल्ली की ओर से रविवार को दिए गए स्पष्टीकरण के बाद आया कदम माना जा रहा है।
यह पूरा विवाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित उस प्रस्ताव के बाद शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य विश्व मानचित्र में महाद्वीपों के क्षेत्रफल को अधिक सटीक तरीके से प्रदर्शित करने की दिशा में काम करना है। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद नक्शे को लेकर सोशल मीडिया और कूटनीतिक हलकों में भारत के रुख पर चर्चा तेज हुई।
भारत ने क्या कहा था?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि भारत का समर्थन मानचित्रों में समान क्षेत्रफल के प्रतिनिधित्व के मूल सिद्धांत से जुड़ा था। उन्होंने यह भी साफ किया कि प्रस्ताव के पक्ष में मतदान को किसी विशेष नक्शे, प्रोजेक्शन या राष्ट्रीय सीमाओं के किसी खास चित्रण का समर्थन नहीं माना जाना चाहिए।
यानी भारत ने अपने मतदान को किसी क्षेत्रीय दावे की स्वीकृति के रूप में देखने से साफ इनकार किया। नई दिल्ली का जोर इस बात पर था कि प्रस्ताव का केंद्र कार्टोग्राफिक प्रतिनिधित्व यानी मानचित्र पर भौगोलिक क्षेत्रों को दिखाने के तरीके में अधिक संतुलन लाना है।
दो दिन बाद क्यों बढ़ा विवाद?
भारत का मतदान संयुक्त राष्ट्र महासभा की उस प्रक्रिया का हिस्सा था, जिसमें पारंपरिक विश्व मानचित्रों में क्षेत्रफल के असमान प्रदर्शन से जुड़ी समस्या पर ध्यान दिया गया। खास तौर पर कुछ लोकप्रिय मानचित्र प्रक्षेपणों में भूमध्य रेखा से दूर स्थित देशों और क्षेत्रों का आकार वास्तविकता से काफी बड़ा दिखाई दे सकता है।
भारत ने इसी व्यापक सिद्धांत के समर्थन में वोट दिया। लेकिन पाकिस्तान ने इस घटनाक्रम को जम्मू-कश्मीर के पुराने और संवेदनशील विवाद से जोड़ दिया। दोनों देशों के बीच जम्मू-कश्मीर लंबे समय से कूटनीतिक और राजनीतिक तनाव का प्रमुख मुद्दा रहा है।


