नई दिल्ली: लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर अपनी नापाक हरकतों से बाज न आने वाले चीन (China) को अब मुहतोड़ जवाब मिलने वाला है। भारतीय सेना के 20,000 करोड़ रुपये के सबसे बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स में से एक ‘प्रोजेक्ट जोरावर’ (Project zorawar) को रफ्तार मिल गई है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत ऊंचे पहाड़ी इलाकों (High-Altitude Areas) में तैनाती के लिए खास लाइट टैंक बनाए जाएंगे।
ताजा जानकारी के मुताबिक, देश के सबसे भरोसेमंद औद्योगिक घराने टाटा समूह (Tata Group) ने इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाकर बाजी मार लगी है। वहीं, आनंद महिंद्रा की अगुवाई वाली महिंद्रा भी इस प्रोजेक्ट की हिस्सा बनेगी और टैंक का प्रोटोटाइप तैयार करेगी।
क्या है ‘प्रोजेक्ट जोरावर’?
2020 के गलवान संघर्ष के बाद चीन ने पूर्वी लद्दाख और एलएसी के कई ऊंचे इलाकों में अपने हल्के टैंक (Type 15 light tanks) तैनात कर दिए हैं। भारत के पास मौजूद T-72 और T-90 टैंक वजन में बहुत भारी (45-46 टन) है, जिन्हें 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई वाले दुर्गम रास्तों पर ले जाना और तेजी से मूव करने बेहद मुश्किल हो जाता है।
इस कमी को पूरा करने के लिए ‘प्रोजेक्ट जोरावर’ शुरू किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत सेना के लिए 25 टन से कम वजन वाले आधुनिक और हल्के टैंक बनाए जाने हैं। वजन कम होने के कारण इन टैंकों को चिनूक हेलीकॉप्टर या सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों के जरिए आसानी से एयरलिफ्ट करके कम समय में सीमा पर किसी भी ऊंचाई वाले इलाके में तैनात किया जा सकेगा।
टाटा महिंद्रा की जुगलबंदी
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, टाटा समूह की कंपनी टाटा एडवांस्ड लिमिटेड (TASL) प्रोजेक्ट जोरावर के लिए L1 बनाकर उभरी है। टाटा जल्द ही सेना की जरूरतों के हिसाब से उस लाइट टैंक का निर्माण शुरू करेगी। हालांकि टाटा ने सबसे कम बोली लगाई है, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने एक अहम फैसला लेते हुए “महिंद्रा डिफेंस सिस्टम” को भी लाइट टैंक का प्रोटोटाइप विकसित करने का कहा है। इसका मतलब है कि भारत के दो सबसे बड़े कॉर्पोरेट दिग्गज सेना के लिए बेहतरीन युद्धक टैंक बनाने में अपना दमखम दिखाएंगे।
जोरावर टैंक छुड़ाएगा दुश्मनों के छक्के!
यह केवल एक लोहे का टैंक नहीं होगा, बल्कि पूरी तरह से AI पावर्ड होगा, जिससे यह दुश्मन की लोकेशन और खतरों को पहले ही भांप सकेगा। इन टैंकों में ‘टैक्टिकल ड्रोन्स’ को ऑपरेट करने और उन्हें दुश्मन के ठिकानों पर हमले के लिए इस्तेमाल करने की क्षमता होगी। दुश्मन की एंटी-टैंक मिसाइलों से बचने के लिए इसमें ‘एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम’ लगाया जाएगा। ये टैंक न सिर्फ ऊंची पहाड़ियों पर दौड़ेगा बल्कि एम्फीबियस क्षमताओं से लैस होने के कारण नदीं और पैंगोंग त्सो जैसी बड़ी झीलों को भी आसानी से पार कर सकेगा।
टाटा और महिंद्रा जैसी स्वदेशी कंपनियों के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने से न केवल ‘मेक इन इंडिया’ को बूस्ट मिलेगा बल्कि एलएसी पर भारतीय सेना की ताकत बढ़ जाएगी।

