अहमदाबाद: नाबालिग से बलात्कार के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को बड़ा झटका लगा है। गुजरात के हाईकोर्ट ने आसाराम की अस्थायी जमानत की अर्जी खारिज कर दी है। आसाराम बापू ने अपनी याचिका में 20 दिन की जमानत मांगी थी। हालांकि उच्च न्यायालय ने आसाराम को सुप्रीम कोर्ट जाने की छूट दे दी है। जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एल एस पीरजादा की खंडपीठ ने उनकी याचिका खारिज की।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका
गुजरात हाईकोर्ट पीठ ने कहा कि इस स्तर पर याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को स्वास्थ्य बिगड़ने पर उससे संपर्क करने की स्वतंत्रता दी है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने अपने आदेश में यह अनुमति दी थी। उन्हें चौबीसों घंटे केयरटेकर भी प्रदान किया गया है। गौरतलब हो कि आसाराम की सजा निलंबित करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। आसाराम ने दलील दी कि राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें 3 अगस्त को दूसरे दुष्कर्म मामले में 20 दिन की पैरोल दी थी। लेकिन अगर वे इस मामले में जेल में रहते तो वह पैरोल किसी काम की नहीं होती। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार ने उनकी जमानत याचिका का विरोध किया। आसाराम अभी राजस्थान के जोधपुर की एक जेल में बंद हैं।
हाईकोर्ट जाने से पहले मांगी थी पैरोल
आसाराम ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया था। इससे पहले गुजरात जेल अधिकारियों ने उनकी पैरोल का अनुरोध खारिज कर दिया था। जेल अधिकारियों ने कहा था कि उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील गुजरात हाईकोर्ट में लंबित है। जनवरी 2023 में गांधीनगर की एक अदालत ने आसाराम को दोषी ठहराया था। यह दोषसिद्धि सूरत की एक महिला शिष्या के बलात्कार से संबंधित थी। गुजरात का मामला आसाराम के अहमदाबाद के पास मोटेरा से जुड़ा है। दूसरा मामला राजस्थान स्थित उनके आश्रम में एक नाबालिग लड़की के बलात्कार से जुड़ा है। दोनों मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई है।

