अहमदाबाद: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने गुजरात दौरे के दौरान वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर हो रही राजनीतिक आलोचना पर प्रतिक्रिया दी। अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जैसे पूरब में सूरज का उगना अटल सार्वभौमिक सत्य है, वैसे ही राजनीतिक हमलों के बावजूद चुनाव आयोग की प्रक्रिया की ईमानदारी भी अडिग रहती है। उन्होंने वोटिंग प्रतिशत बढ़ने को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी जवाब दिया और कहा कि हाल के विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में लोगों का मतदान के लिए आगे आना लोकतंत्र में मतदाताओं के भरोसे को दर्शाता है।
पुराने डेटा की मदद से नामों की मैपिंग करना जरूरी
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि वोटर लिस्ट की सफाई के दौरान पुराने डेटा की मदद से नामों की मैपिंग करना जरूरी है। इससे पुरानी प्रविष्टियों को हटाने और अलग-अलग पहचान पत्रों में नामों की स्पेलिंग में अंतर जैसी गड़बड़ियों को ठीक करने में मदद मिलती है। उन्होंने नागरिकता कानून और पुरानी मतदाता सूचियों का भी जिक्र किया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि SIR जैसी प्रक्रिया में चुनाव आयोग को जनता की कड़ी जांच-पड़ताल का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और व्यवस्थित बनाना है।
भारत में लगभग 90 करोड़ वोटर
सीईसी कुमार ने कहा कि भारत में लगभग 90 करोड़ वोटर हैं और लोकसभा चुनाव कराना दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आम चुनाव के दौरान लगभग 1.8 करोड़ कर्मचारी चुनावी ड्यूटी में लगे होते हैं, और इतने बड़े वोटर बेस और वर्कफोर्स का प्रबंधन भारत की चुनाव प्रणाली की खास क्षमता को दर्शाता है। सीईसी कुमार ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के तीन मुख्य चरण हैं: वोटर लिस्ट तैयार करना, वोटिंग और वोटों की गिनती। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 12 लाख बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) वोटरों के घरों पर जाकर वोटर लिस्ट की जांच करते हैं। यह पक्का करने के लिए लगातार जांच की जाती है कि योग्य वोटर शामिल हों और अयोग्य नाम हटा दिए जाएं।
इस बात पर दिया जोर
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव प्रणाली का मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि हर योग्य व्यक्ति वोटर बने और कोई भी अयोग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल न हो। मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की भागीदारी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बूथ लेवल एजेंट वोटर लिस्ट की जांच में भाग लेते हैं, जबकि असली वोटिंग शुरू होने से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर मॉक पोल (नकली वोटिंग) कराए जाते हैं उन्होंने आगे कहा कि ईवीएम इंटरनेट, वाई-फाई या ब्लूटूथ से कनेक्टेड नहीं होती हैं।
वोटिंग शुरू होने से पहले कराया जाता है मॉक पोल
उन्होंने कहा कि वोटिंग शुरू होने से पहले उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मॉक पोल कराया जाता है, और मशीनों के काम करने की जांच के बाद ही असली वोटिंग शुरू होती है। सीईसी ने यह भी कहा कि वोटिंग के बाद, डाले गए वोटों की कुल संख्या फॉर्म 17सी में दर्ज की जाती है और तय प्रक्रिया के अनुसार ईवीएम को सील कर दिया जाता है। वोटों की गिनती के दौरान, उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंटों की मौजूदगी में ईवीएम के नतीजों की भी जांच की जाती है। सीईसी कुमार ने कहा कि चुनाव मशीनरी के भीतर बातचीत को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है।

