मुंबई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है. मुंबई नॉर्थ साइबर पुलिस ने 68 साल के एक बुजुर्ग से करीब 1 करोड़ 12 लाख रुपये की ठगी के मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को दूरसंचार विभाग, पुलिस और दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को डराया.
पुलिस के मुताबिक, बुजुर्ग को बताया गया कि उनके मोबाइल नंबर और पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल 238 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुआ है. इसके बाद फर्जी सुप्रीम कोर्ट नोटिस भेजकर गिरफ्तारी का डर दिखाया गया और करीब दो हफ्ते तक वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया. आरोपियों में एक निजी बैंक का ऑपरेशंस मैनेजर और IIT दिल्ली से पढ़ा वेब डेवलपर भी शामिल है.
पुलिस के मुताबिक, 30 जुलाई से 12 अगस्त 2026 के बीच 68 वर्षीय पीड़ित को व्हाट्सऐप वीडियो कॉल किए गए. शुरुआत में आरोपी ने खुद को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया. पीड़ित को कहा गया कि उसके मोबाइल नंबर और आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल हुआ है और उसके खिलाफ मामला दर्ज है. इसके बाद कॉल को कथित तौर पर एक फर्जी पुलिस अधिकारी से जोड़ दिया गया.
परिवार के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी की दी धमकी
पुलिस के मुताबिक, वीडियो कॉल के दौरान पुलिस का लोगो और वर्दी का इस्तेमाल कर पीड़ित को विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि वह किसी वास्तविक जांच का हिस्सा है. पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर रहने और समय-समय पर अपनी लोकेशन बताने के लिए कहा गया. परिवार को जानकारी देने पर परिवार के दूसरे सदस्यों को भी गिरफ्तार करने की धमकी दी गई.
एक करोड़ से अधिक रकम करवाई ट्रांसफर
जांच के मुताबिक, आरोपियों ने पीड़ित से उसकी आर्थिक स्थिति और बैंक खातों की जानकारी हासिल की. इसके बाद उसे अपनी रकम और फिक्स्ड डिपॉजिट से पैसे अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया.
पुलिस के अनुसार, इस तरह करीब 1 करोड़ 12 लाख 26 हजार की रकम ट्रांसफर कराई गई.
गोल्ड ट्रेडिंग कंपनी के खाते तक पहुंची रकम
जांच के दौरान पुलिस ने पैसों के ट्रांजैक्शन की कड़ियों को खंगाला. पुलिस के मुताबिक, ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा एक गोल्ड ट्रेडिंग कंपनी के बैंक खाते में पहुंचा. जांच में कंपनी से जुड़े मोबाइल नंबर और सिम कार्ड की कड़ियां गिरफ्तार आरोपियों तक पहुंचीं. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम को किन-किन खातों में ट्रांसफर किया गया और आगे कहां निकाला गया. मुंबई साइबर पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है.
पुलिस ने आरोपियों को किया गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में राजेशकुमार मोहनलाल जैन, मोहम्मद तारिक अन्वर मोमीन, शिखर मुकेश त्यागी, गौरव महेश गोयल, अजयकुमार काली प्रसाद शर्मा और चिंतनकुमार सुरेशभाई देसाई का नाम शामिल है. आरोपियों की कथित भूमिका बैंक खातों की व्यवस्था करने, सिम कार्ड उपलब्ध कराने, रकम ट्रांसफर करने और रकम निकालने तक अलग-अलग स्तर पर थी.
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में गौरव महेश गोयल IIT दिल्ली से पढ़ा है और वेब डेवलपर के तौर पर काम करता है. वहीं शिखर मुकेश त्यागी एक निजी बैंक में ऑपरेशंस मैनेजर के पद पर कार्यरत बताए गए हैं. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों की भूमिका इस मामले तक सीमित थी या इनके जरिए चल रहे किसी बड़े साइबर नेटवर्क से भी इनका संबंध है.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी चिंतन देसाई मुंबई से दिल्ली और फिर उत्तर प्रदेश के बिजनौर पहुंचा. जांचकर्ताओं का आरोप है कि वहां साथियों की मदद से ठगी की रकम को ट्रांसफर और निकालने की कोशिश की गई. पुलिस अब इस पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही है.
आरोपियों के पास से 20 मोबाइल फोन बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 25 बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, ATM कार्ड, पासबुक और आधार कार्ड बरामद किए हैं. जांच एजेंसियां इन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और बैंक खातों की जांच कर रही हैं ताकि साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके.
डिजिटल अरेस्ट से सावधान रहने की अपील
बताया गया कि बुजुर्ग करीब दो सप्ताह तक आरोपियों के दबाव में रहा. बाद में जब उनकी बेटी को इस पूरे मामले की जानकारी हुई, तब परिवार ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क किया. इसके बाद नॉर्थ साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया. DCP साइबर बजरंग बनसोडे की निगरानी में पुलिस टीम ने बैंक खातों और पैसों के ट्रांजैक्शन की जांच शुरू की. मुंबई पुलिस ने एक बार फिर लोगों को डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड से सावधान रहने की अपील की है.

