बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में पहले महिला से छेडख़ानी का विरोध करने पर तीन माह की बच्ची को आग में फेंका गया। इसके बाद अब पीडि़त परिवार पर जनप्रतिनिधि केस उठाने का दबाव बना रहे हैं। इसके बाद से पूरा परिवार डरा सहमा हुआ है। जानकारी के अनुसार जिले के बोचहां थाने के एक गांव में महिला से छेडख़ानी का विरोध करने पर तीन माह की बच्ची को आग में फेंकने के मामले में पीड़ित परिवार पर जनप्रतिनिधि केस उठाने का दबाव बना रहे हैं। रविवार को एफआईआर की कॉपी लेने थाने पर पहुंचे पीड़िता के पति पर एक जनप्रतिनिधि के भाई ने कुछ रुपये लेकर केस उठा लेने का दबाव बनाया है। थाने के एक पुलिसकर्मी ने भी पीड़ित को जनप्रतिनिधि की बात मानने को कहा। इसके बाद से पूरा परिवार डरा सहमा हुआ है। इधर, पीडि़त परिवार आरोपितों के भय से बोचहां थाना क्षेत्र वाले किराये के मकान को छोड़ दिया है। फिलहाल वह मिठनपुरा इलाके स्थित अपने शहरी घर पर है। बच्ची के पिता ने बताया कि थाने पर एक जनप्रतिनिधि के भाई ने केस को कुछ रुपये लेकर उठा लेने की धमकी दी है। पुलिसकर्मियों ने भी एसएसपी से शिकायत करने पर उन्हें डांट फटकार लगायी है। पीड़ित ने इसकी जानकारी वरीय पुलिस अधिकारियों को देने की बात कही है। प्रभारी डीएसपी पूर्वी सह डीएसपी मुख्यालय बैद्यनाथ प्रसाद ने बताया कि बोचहां पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। वर्तमान में छेडख़ानी की धारा भी अंकित है। मीनापुर सर्किल इंस्पेक्टर को गांव भेजा गया था। उन से जांच रिपोर्ट मांगी गई है। उनके रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। परिजन पर दबाव बनाया जा रहा है। इसकी शिकायत उनके पास नहीं आयी है। पुलिस सूत्रों की माने तो मीनापुर सर्किल इंस्पेक्टर मो. अरशद नूमानी ने मामले में ग्रामीणों का बयान दर्ज किया है। ग्रामीणों का बयान और पीडि़त पक्ष के बयान में विरोधाभास है। इसको लेकर सर्किल इंस्पेक्टर पीड़ित महिला से फिर से पूछताछ करेंगे। जिस वक्त वे घटनास्थल गए थे। महिला वहां मौजूद नहीं थी। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि दोनों पक्ष के बच्चों के बीच विवाद हुआ था। इसे बड़ा विवाद बनाकर तूल दिया जा रहा है। पीडि़ता कई माह से अपना घर होते हुए भी गांव में ही किराये के मकान में रह रही थी। जांच रिपोर्ट पर डीएसपी ने बताया कि इंस्पेक्टर की जांच रिपोर्ट उनके पास नहीं आयी है। सर्किल इंस्पेक्टर के साथ बोचहां पुलिस भी साथ में थी।

