छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलने वाली दर्दनाक खबर सामने आई है। परासिया क्षेत्र में बाल रोग विशेषज्ञों की अनुपलब्धता और लचर प्रशासनिक व्यवस्था के चलते आठ साल के मासूम बच्चे वेदांत की जान चली गई। कोल्ड्रिफ सिरप कांड के साये से उबर रहे इस इलाके में हुई इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों के दावों और हकीकत के फर्क को उजागर कर दिया है।
बच्चे की मौत का दर्दनाक सफर
शिवपुरी के मिट्टी टोला में मजदूरी करने वाले हरिद्वार उईके के दो बेटे वेदांत और अयांश पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे। परिवार ने पहले स्थानीय स्तर पर उनका इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन जब बच्चों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो दोनों को परासिया के सरकारी अस्पताल लाया गया। यहां हालत गंभीर होने पर वेदांत को छिंदवाड़ा रेफर किया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। वहीं, दूसरे बच्चे अयांश को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में डेरा डाला
बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम के निर्देश पर डॉ. कय्यूम के नेतृत्व में एक विशेष टीम शिवपुरी गांव पहुंची। टीम ने मृतक बच्चे के घर और आसपास के क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया। घरों में जमा पानी और मच्छरों के लार्वा की तलाश के साथ-साथ पानी के नमूने भी एकत्र किए गए। हालांकि, शुरुआती जांच में विभाग अभी तक मौत के असली कारण को लेकर किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
परासिया में बाल रोग विशेषज्ञों का गंभीर संकट
स्थानीय लोगों का कहना है कि परासिया क्षेत्र में बच्चों के इलाज के लिए लंबे समय से बाल रोग विशेषज्ञों की भारी कमी बनी हुई है। क्षेत्र के चर्चित कोल्ड्रिफ सिरप कांड के बाद से कई बाल रोग विशेषज्ञ जेल की हवा काट रहे हैं, जिसके कारण अस्पताल में नियमित डॉक्टरों की भारी किल्लत हो गई है। बड़ी आबादी और बच्चों की संख्या अधिक होने के बावजूद सरकारी स्तर पर कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे मजबूरन परिजनों को अपने बच्चों को लेकर दूसरे शहरों की ओर भागना पड़ता है।

