Shradh TiThi Kaise Pata Kare: इस साल पितृ पक्ष का प्रारंभ 27 सितंबर दिन रविवार से हो रहा है. पितृ पक्ष की 15 तिथियों में पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान, पंचबलि कर्म आदि किए जाते हैं. परिवार के सदस्य का देहांत जिस तिथि को हुआ है, उस तिथि को ही उस पितर का श्राद्ध, तर्पण आदि करते हैं. अब कुछ लोगों के सामने समस्या यह आती है कि जिस सदस्य की मृत्यु हुई है, उसकी तारीख पता है, लेकिन उस दिन तिथि क्या थी, यह ज्ञात नहीं है. ऐसे में उस व्यक्ति के निधन की तिथि कैसे पता करें?
श्राद्ध तिथि कैसे पता करें?
उदाहरण के लिए मनोहर के पिता की मृत्यु 1 अगस्त 1998 को हुई थी, लेकिन उस समय वह बालक था, इस वजह से उसे अपने पिता की मृत्यु की तिथि पता नहीं है. इससे को जानने का सबसे आसान तरीका है पंचांग. आप पंचांग की मदद से उस तारीख पर कौन सी तिथि थी, पता कर सकते हैं.
इसके लिए आप 100 साल वाले पंचांग को बाजार से ले सकते हैं या फिर ऑनलाइन पंचांग देखें. आप कोई भी ऑनलाइन पंचांग अपने मोबाइल में खोल लें. अब अप उस पंचांग के कैलेंडर में 1 अगस्त 1998 की तारीख सेलेक्ट करें.
जैसे ही वो तारीख पंचांग में आएगी तो उस दिन के पूरे ग्रह नक्षत्र की स्थिति सामने आ जाएगी. 1 अगस्त 1998 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी. अष्टमी तिथि 06:42 ए एम तक थी, लेकिन सूर्योदय 05:42 ए एम पर हो चुका था, ऐसे में उदयातिथि के आधार पर पूरे दिन अष्टमी होगी, न कि नवमी तिथि. अब आपको यह पता चल गया कि मनोहर के पिता की मृत्यु अष्टमी तिथि को हुई थी.
अंग्रेजी कैलेंडर में रात 12 बजे के बाद दिन बदलता है क्योंकि एक दिन 24 घंटे का होता है, वहीं पंचांग में तिथि 24 घंटे की नहीं होती है. यह 24 घंटे से कम या ज्यादा भी हो सकती है. इस वजह से तिथि की गणना सूर्योदय समय के साथ होती है. सूर्योदय के समय जो तिथि होगी, वह पूरे दिन के लिए मान्य होगी. जैसे 1 अगस्त 1998 को अष्टमी तिथि 06:42 ए एम तक ही थी, लेकिन उस दिन अष्टमी तिथि में सूर्योदय हो चुका था, तो पूरे दिन अष्टमी तिथि ही रहेगी. इस तरह से कोई भी व्यक्ति अपने परिजनों की तिथि ज्ञात कर सकता है.
कब करें श्राद्ध?
अब मनोहर जानता है कि उसके पिता की मृत्यु अष्टमी तिथि को हुई थी. तो जब पितृ पक्ष का प्रारंभ होगा तो वह अष्टमी श्राद्ध को अपने पिता के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि करेगा. अष्टमी श्राद्ध पितृ पक्ष में आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है.
ऐसे ही पितृ पक्ष में 15 तिथियां होती हैं, प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक. किसी भी व्यक्ति की मृत्यु किसी भी माह के किसी भी पक्ष की किसी भी तिथि को हुई हो, पितृ पक्ष में उसका श्राद्ध, तर्पण आदि कार्यक्रम उस तिथि पर ही होगा.
जिनको मृत्यु की तारीख नहीं पता
यदि आपको अपने परिवार के किसी सदस्य के मृत्यु की तारीख नहीं पता है तो परेशान न हों. शास्त्रों में उसका भी विधान है. पितृ पक्ष में सर्वपितृ अमावस्या का दिन होता है, जिसे आश्विन अमावस्या भी कहते हैं. उस दिन आप अपने परिवार के उस सदस्य का श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण आदि कर सकते हैं.

