चक्रवात ‘अर्नब’ के असर से प्रदेश में पिछले 24 घंटों से रायपुर, बस्तर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के जिलों में मूसलाधार बारिश हो रही है। औसतन 60 मिमी पानी बरसा, जो पूरे मानसूनी सीजन का एक नया रेकॉर्ड है। भारी बारिश के चलते बस्तर, कोंडागांव और गरियाबंद जैसे जिलों में एक ही दिन में सामान्य से 3500 से 4000 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। कैचमेंट एरिया में हो रही तेज बारिश के कारण शुक्रवार को धमतरी जिले में गंगरेल बांध के 14 गेट खोलने पड़े, जिससे महानदी उफान पर आ गई है।
राजनांदगांव में गणेश विसर्जन स्थगित
वहीं, शिवनाथ नदी के उफान पर होने से राजनांदगांव में गणेश विसर्जन स्थगित कर शनिवार तक के लिए टाल दिया गया है। बस्तर संभाग में हालात सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां निचले इलाकों में पानी भर जाने से लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, 27 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। अत्यधिक बारिश, जलभराव और नदी-नालों में उफान के कारण दुर्ग, धमतरी, बालोद, बीजापुर, बस्तर, सुकमा और कांकेर जिलों में शुक्रवार को प्रशासन ने सभी शासकीय व निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया। इसके साथ ही चल रही त्रैमासिक परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है।

बारिश के आंकड़े और टूटे रिकॉर्ड
पिछले 24 घंटों में सबसे ज्यादा बारिश जगदलपुर में 274.2 मिमी और रायपुर में 117.4 मिमी दर्ज की गई। जगदलपुर में 6 साल (पिछला रेकॉर्ड 6 सितंबर 2019 को 288.5 मिमी) और रायपुर में 2 साल पुराना रेकॉर्ड टूटा है। मानसून सीजन में प्रदेश में कुल 1123.4 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य के बराबर है। सीजन में सर्वाधिक बारिश नारायणपुर (1595.7 मिमी) में हुई, जबकि सबसे कम बारिश बेमेतरा (596.3 मिमी) और सरगुजा में दर्ज की गई है।
प्रमुख स्थानों पर दर्ज वर्षा (सेमी में):
लोहंडीगुड़ा 23, बास्तानार व नानगुर 22, भनपुरी व मर्दापाल 21, तोकापाल व माकड़ी 20, बस्तर व केशकाल 19, बड़े बचेली 18, देवभोग 17, बालोद 16.5, दुर्ग 14.06, कांकेर 13, धमतरी 11, और नगरी व छुरा में 10 सेमी बारिश हुई।
किसानों पर आफत: धान की फसल को भारी नुकसान
तेज हवाओं के साथ हुई बेमौसम बारिश से रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग में धान की फसल गिर गई है। हरूना और महामाया प्रजाति की धान में बालियां निकल आई थीं, जो तेज हवा से झड़ गईं। कृषि विशेषज्ञों ने खेतों से तुरंत जल निकासी की सलाह दी है, ताकि पौधे सड़ने से बच सकें। दूसरी ओर, बेमेतरा जिले में सूखे की मार झेल रहे खेतों के लिए यह बारिश फायदेमंद साबित हुई है।
राहत और बचाव कार्य जारी
बस्तर संभाग में भारी बारिश और जलभराव के चलते निचले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल कर राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मुस्तैदी से जुटी हैं, जहां प्रभावितों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा की पूरी व्यवस्था की जा रही है।
मुख्यमंत्री की अपील
प्रदेश में बाढ़ और जलभराव की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी जिला कलेक्टरों और प्रशासन को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने आम जनता से उफनते नदी-नालों, जलप्रपातों और जलमग्न पुल-पुलियों से दूर रहने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अफवाहों से बचने, अनावश्यक यात्रा न करने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल डायल 112 या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने का आग्रह किया है।