अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी है। व्हाइट हाउस के अनुसार, चीन और अमेरिका ‘सुपर इंटेलिजेंस’ से जुड़ी घटनाओं को लेकर एक नया कम्युनिकेशन चैनल खोलेंगे। दोनों देशों ने कोयले को लेकर भी समझौता किया है, जिसके तहत चीन 2027 और 2028 में अमेरिका से हर साल कम से कम 1 करोड़ टन कोयला आयात करेगा।

AI अब कहलाएगा ‘सुपर इंटेलिजेंस’, नवंबर में होगी अगली बैठक

बैठक का सबसे बड़ा फैसला टेक्नोलॉजी को लेकर रहा। दोनों देशों ने फैसला किया है कि अब वे ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) की जगह ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द का इस्तेमाल करेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप काफी समय से AI शब्द को बदलकर ‘सुपर इंटेलिजेंस’ करने की बात कर रहे थे। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भी उन्होंने कहा था कि अमेरिकी आधिकारिक दस्तावेजों में अब इसे ‘सुपर’ कहा जाएगा। इस समझौते के तहत नवगठित ‘US-China Super Intelligence Dialogue’ की अगली महत्वपूर्ण बैठक इसी साल नवंबर में आयोजित की जाएगी।

चीन खरीदेगा अमेरिका से कोयला

बिजनेस और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भी एक बड़ा फैसला हुआ है। चीन अगले साल (2027) और वर्ष 2028 में अमेरिका से कम से कम 10 मिलियन टन कोयला आयात करने पर सहमत हो गया है। अमेरिका में चीन से आने वाले रेयर अर्थ (Rare Earth) और दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर भी चर्चा हुई।

ईरान परमाणु मुद्दा और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट

मिडिल ईस्ट के हालात पर चर्चा करते हुए ट्रंप और शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि किसी भी देश या संगठन को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अवैध टोल वसूलने का अधिकार नहीं है। ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोलने के बदले प्रतिबंध हटाने का प्रस्ताव दिया था, जिस पर वाशिंगटन के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

रूस और ताइवान पर क्या बात हुई?

अमेरिका ने प्रस्ताव रखा कि अमेरिका, रूस और चीन तीनों को मिलकर खतरनाक हथियारों को कंट्रोल करने के लिए आपस में बात करनी चाहिए।

ताइवान पर साधी चुप्पी

हैरानी की बात यह रही कि व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में ताइवान और दक्षिण चीन सागर जैसे संवेदनशील मुद्दों का कोई उल्लेख नहीं किया गया। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल शेनझेन में होने वाले आगामी APEC शिखर सम्मेलन को ध्यान में रखते हुए अमेरिका फिलहाल ताइवान को बड़े हथियारों की बिक्री टाल सकता है।

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