Lucknow News: उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के अचानक राजनीति में उतरने के फैसले ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। 13 साल की प्रशासनिक सेवा छोड़ वीआरएस लेने वाली दिव्या मित्तल के इस फैसले पर अब नेताओं की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। योगी सरकार में मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने उन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि प्रशासनिक अधिकारी बनना फिर भी आसान है, लेकिन नेता बनना और चुनाव जीतकर विधायक बनना बेहद कठिन काम है। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि उनके पास बहुत पैसा होगा, इसलिए वे राजनीति में किस्मत आजमाने निकली हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लंदन में जेपी मॉर्गन की चमचमाती नौकरी छोड़कर भारत लौटीं और फिर आईएएस बनीं दिव्या मित्तल मिर्जापुर, देवरिया और संत कबीर नगर में डीएम रह चुकी हैं। सोशल मीडिया पर एक भावुक और तीखा संदेश जारी करते हुए उन्होंने बिना किसी पार्टी के सीधे जनता के साथ मिलकर हिसाब मांगने का ऐलान किया है। दिव्या मित्तल ने साफ कहा कि वे किसी की दया पर नहीं, बल्कि जनता के हक की लड़ाई लड़ने आई हैं। उन्होंने अपने सेवा काल के किस्से याद दिलाते हुए पूछा कि अधूरी सड़कों, पेपर लीक और लटके हुए प्रोजेक्ट्स का हिसाब कौन देगा? संविधान में जनता सर्वोपरि है तो फिर यह ऊपर बैठा हुक्मरान कौन है, जिसके इशारे पर लोगों के काम रोके जाते हैं?
दूसरी ओर, ओपी राजभर ने न केवल दिव्या मित्तल के दावों को खारिज किया, बल्कि विपक्षी गठबंधन इंडिया पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने सपा और कांग्रेस को दगा कारतूस करार देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर एनडीए का दबदबा कायम रहेगा और विपक्ष चाहे जितने भी जतन कर ले, जनता के बीच उनकी दाल नहीं गलने वाली। पूर्व आईएएस के इस नए सियासी अवतार और उस पर नेताओं के बयानों से यूपी की राजनीति का पारा चढ़ गया है।

