क्रिएटिनिन का नाम सुनते ही कई लोगों को लगता है कि यह किडनी में जमा होने वाला कोई जहर है. क्रिएटिनिन असल में शरीर में मांसपेशियों के सामान्य मेटाबॉलिज्म से बनने वाला एक अपशिष्ट पदार्थ है, जिसे स्वस्थ किडनी खून से फिल्टर करके पेशाब के रास्ते बाहर निकालती है. जब किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होती है, तो खून में क्रिएटिनिन का लेवलबढ़ जाता है.
इसलिए क्रिएटिनिन का बढ़ना अपने आप में बीमारी नहीं, बल्कि कई बार किडनी की कार्यक्षमता में गड़बड़ी का संकेत होता है. इसे नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है. ऐसे में जानिए किडनी को सुरक्षित रखने के आसान और असरदार टिप्स के बार में.
क्यों बढ़ता है क्रिएटिनिन?
क्रिएटिनिन बढ़ने के कई कारण होते हैं. क्रिएटिनिन बढ़ने का सबसे आम कारण किडनी की बीमारी, शरीर में पानी की कमी, लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज होती है. शरीर में पानी की कमी होने से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे किडनी के लिए अपशिष्ट पदार्थों को छानना कठिन हो जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादा रेड मीट, डेयरी प्रोडक्ट या मसल्स बनाने वाले प्रोटीन सप्लीमेंट्स का सेवन करने से भी शरीर में क्रिएटिनिन बढ़ता है. वहीं कुछ दर्द निवारक दवाइयां और एंटीबायोटिक्स का ज्यादा सेवन भी किडनी पर दबाव डालता है.
क्रिएटिनिन को बढ़ने से कैसे रोकें?
शरीर को हाइड्रेट रखें और रोजाना पर्याप्त पानी पिएं, जिससे टॉक्सिन्स और अतिरिक्त क्रिएटिनिन पेशाब के जरिए बाहर निकल सकें. यदि आप जिम जाते हैं और क्रिएटिन या अन्य हैवी वर्कआउट सप्लीमेंट्स लेते हैं, तो उनका सेवन सीमित मात्रा में करना ही बेहतर होता है. वहीं किडनी को स्वस्थ रखने के लिए अपनी डाइट में ताजे फल और हरी सब्जियों को शामिल करें. अगर आपको डायबिटीज और ब्लड प्रेशर हैं, तो नियमित रुप से अपनी जांच करवाते रहें और डॉक्टर की सलाह पर ध्यान दें.
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक क्रिएटिनिन का स्तर पुरुषों में 0.7-1.3 mg/dL और महिलाओं में 0.6-1.1 mg/dL के बीच सामान्य माना जाता है. यदि यह स्तर लगातार बढ़ रहा हो या 1.5-1.7 mg/dL से अधिक हो जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. वहीं अगर क्रिएटिनिन तेजी से बढ़ने के साथ पेशाब कम होना, पैरों या चेहरे पर सूजन, सांस फूलना, लगातार उल्टी, कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने लगे, तो डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होता है.
डिसक्लेमर : इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


