अजमेर: जिस अजमेर सेंट्रल जेल के अहाते में कभी जेलर दिव्या चौधरी के कदमों की आहट से मातहतों में हलचल मच जाती थी, मंगलवार को वही जेल एक बिल्कुल नई और अप्रत्याशित भूमिका में उनका इंतजार कर रही थी। कभी प्रशासनिक व्यवस्था की कमान संभालने वाली यह अधिकारी अब खुद उसी जेल के सलाखों के पीछे एक बंदी के रूप में दाखिल हुई हैं। उन पर पद के दुरुपयोग और गंभीर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत इस सनसनीखेज खुलासे से हुई कि तत्कालीन जेलर दिव्या चौधरी जेल में बंद महिला कैदियों का अनधिकृत इस्तेमाल कर रही थीं। वे किसी अदालती आदेश, चिकित्सकीय आपातस्थिति या सरकारी कामकाज के बिना ही महिला कैदियों को अपने निजी निवास पर ले जाती थीं। आरोप है कि वे इन बंदियों से अपने घर की सफाई और अन्य घरेलू काम करवाती थीं। अजमेर के पुलिस अधीक्षक (SP) हर्ष वर्धन अग्रवाला के अनुसार, दिव्या चौधरी ने जिन दो महिला बंदियों को जेल से बाहर निकाला था, वे दोनों हत्या के गंभीर मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रही थीं।
गेट पर दी धमकी, गाड़ी में बैठाकर ले गईं घर
पुलिस जांच में सामने आया कि पूर्व जेलर अपनी निजी कार से इन सजायाफ्ता कैदियों को जेल परिसर से बाहर ले जाती थीं। हद तो तब हो गई जब उन्होंने इस प्रक्रिया में मुख्य द्वार पर होने वाली आधिकारिक ‘गेट एंट्री’ तक दर्ज नहीं कराई। जब ड्यूटी पर तैनात महिला सुरक्षाकर्मियों ने बिना किसी वैध दस्तावेज या प्रविष्टि के कैदियों को बाहर ले जाने पर कड़ा ऐतराज जताया, तो दिव्या चौधरी ने अपनी प्रशासनिक शक्ति का धौंस दिखाया। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को गंभीर परिणाम भुगतने और नौकरी से हटवाने की धमकियां दीं और जबरन बंदियों को अपने साथ ले गईं।
निलंबन के बाद से थीं फरार, कोटा से हुई गिरफ्तारी
जुलाई के महीने में जेल के ही एक सतर्क गार्ड ने इस पूरे काले कारनामे की शिकायत उच्च अधिकारियों से की। सरकारी स्तर पर अभियोजन (प्रोसेक्यूशन) की मंजूरी मिलने के बाद 5 अगस्त को दिव्या चौधरी के खिलाफ औपचारिक FIR दर्ज की गई।
शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने दिव्या चौधरी और उनकी सहयोगी जेल गार्ड सोनिया चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उनका मुख्यालय बीकानेर सेंट्रल जेल से संबद्ध कर दिया। हालांकि, दोनों ने वहां रिपोर्ट नहीं की और फरार हो गईं।
पुलिस टीम ने छापामारी कर दोनों आजीवन कारावास की महिला बंदियों को दिव्या चौधरी के अजमेर स्थित आवास से बरामद किया और वापस जेल भिजवाया। लगभग दो महीने तक पुलिस को चकमा देने के बाद, आखिरकार दिव्या चौधरी को कोटा के एक फ्लैट से गिरफ्तार कर लिया गया।
अदालत का फैसला जानिए
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी पूर्व जेलर को अजमेर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। फिलहाल इस अपराध में उनका साथ देने वाली संदिग्ध मददगार जेल गार्ड सोनिया चौधरी पुलिस की पकड़ से बाहर है और उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

