भारत के राजनीतिक इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व रहे हैं, जिनकी यात्रा केवल सत्ता के गलियारों तक सीमित नहीं रही, उन्होंने संगठन निर्माण, विचारधारा, जनसेवा और राष्ट्र निर्माण की एक लंबी प्रक्रिया से गुजरते हुए अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा को भी इसी व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। यह यात्रा एक ऐसे स्वयंसेवक की यात्रा है, जिसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा से जनसेवा का संस्कार पाया, भारतीय जनता पार्टी के संगठन में काम करते हुए अपनी पहचान बनाई, गुजरात का नेतृत्व किया और प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में स्वयं को स्थापित किया। 7 अक्तूबर, 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। 2026 में वह सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे कर रहे हैं। इस अवधि में लोगों के जीवन स्तर में सुधार और देश की प्रगति के लिए उनके निरंतर प्रयास और योगदान रहे हैं। लेकिन नरेंद्र मोदी की कहानी 2001 से शुरू नहीं होती। इस लंबी यात्रा के पीछे दशकों का संगठनात्मक जीवन, अनुशासन और वैचारिक प्रशिक्षण रहा है।
आर.एस.एस. के स्वयंसेवक से देश के सेवक तक : नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन का विकास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ गहराई से जुड़ा रहा है। उनका संगठनात्मक जीवन अहमदाबाद से शुरू हुआ। बाद में उन्होंने प्रचारक के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। स्वयंसेवकों के जीवन में संगठन, अनुशासन, राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता और समाज के बीच लगातार काम करने पर जोर दिया जाता है। इसके बाद वह भारतीय जनता पार्टी के संगठन में सक्रिय हुए। विभिन्न स्तरों पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाते हुए वे राष्ट्रीय राजनीति में आगे बढ़े। 7 अक्तूबर, 2001 को जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला, तब राज्य एक कठिन दौर से गुजर रहा था। 2001 में कच्छ सहित गुजरात के बड़े हिस्से में विनाशकारी भूकंप आया था। इससे पहले सूखा और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी राज्य को प्रभावित कर चुकी थीं। उन्होंने गुजरात में सुशासन का ऐसा मॉडल विकसित करने का प्रयास किया, जिसमें बुनियादी ढांचे का निर्माण, निवेश, बिजली, कृषि, प्रशासनिक सुधार और समग्र विकास प्राथमिकता बने। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी ने 13 वर्ष तक जिम्मेदारी संभाली। यह उनके प्रशासनिक अनुभव की महत्वपूर्ण नींव बनी, जिसने बाद में उनकी राष्ट्रीय भूमिका को भी आकार दिया।
भाजपा नेता से प्रधानमंत्री तक : 2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति में एक निर्णायक मोड़ था। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को लोकसभा में पूर्ण बहुमत मिला। 26 मई, 2014 को उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। 2019 में भाजपा को एक बार फिर पूर्ण बहुमत मिला। 2024 में नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस यात्रा का एक विशेष रूप से उल्लेखनीय पक्ष यह है कि एक सामान्य संगठनात्मक कार्यकत्र्ता देश के सर्वोच्च निर्वाचित प्रशासनिक पद तक पहुंचा। 2014 के बाद नरेंद्र मोदी ने अपने साथ ‘प्रधान सेवक’ की अवधारणा को जोड़ा। उनके समर्थकों के लिए यह शब्द उनकी राजनीतिक शैली का प्रतीक बन गया। इस शैली का मूल विचार है कि सत्ता कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का शासन बड़े पैमाने पर जनकल्याण और विकासोन्मुखी योजनाओं के लिए जाना जाता है। इनमें जनधन योजना, स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी योजनाएं शामिल हैं, जिनके माध्यम से लाखों लाभाॢथयों तक पहुंचने का प्रयास किया गया। आवास, स्वच्छता, बैंकिंग, रसोई गैस, स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की गईं। इन कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य गरीबों और समाज के कमजोर वर्गों तक बुनियादी सुविधाएं और आॢथक अवसर पहुंचाना रहा है।
डिजिटल इंडिया-शासन की बदली हुई तस्वीर : मोदी युग की एक महत्वपूर्ण विशेषता भारत के सार्वजनिक जीवन का तेजी से डिजिटल होना है। डिजिटल भुगतान, यू.पी.आई., आधार आधारित सेवाएं, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे ने नागरिकों और सरकार के बीच संवाद और सेवाओं के स्वरूप को बदल दिया है। भारत की डिजिटल क्षमता को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी महत्व मिला। 2023 में भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, ग्लोबल साऊथ और समावेशी विकास पर विशेष जोर दिया गया।
विश्व मंच पर नया भारत : पिछले एक दशक में विश्व मंच पर भारत की भूमिका नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण पहचान बनी है। क्वाड, जी20, ग्लोबल साऊथ, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मोदी की विदेश नीति का एक प्रमुख संदेश यह रहा है कि भारत विश्व व्यवस्था में केवल एक सहभागी के रूप में नहीं रहेगा, बल्कि प्रभाव पैदा करने में सक्षम एक मजबूत राष्ट्र की भूमिका निभाएगा।
स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्री के रूप में मोदी का योगदान : किसी भी नेतृत्व का वास्तविक योगदान समय की कसौटी पर परखा जाता है। उसके निर्णयों के स्थायी परिणाम, संस्थाओं पर प्रभाव, नागरिक जीवन में आए बदलाव और भावी पीढिय़ों पर उसके असर से उसका मूल्यांकन होता है। इस अर्थ में नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय हैं। यदि उनके 25 वर्षों की इस यात्रा को एक वाक्य में लिखा जाए, तो कहा जा सकता है कि यह सत्ता की यात्रा से अधिक जिम्मेदारी की यात्रा है। पद की यात्रा से अधिक सेवा की यात्रा है। यह केवल एक व्यक्ति की यात्रा नहीं, बल्कि एक विचार और भारत के उस संकल्प की यात्रा है, जिसे वह ‘विकसित भारत’ के रूप में देखना चाहते हैं।-डा. सतीश पूनिया एवं सुनील बंसल
