चाणक्य नीति के अनुसार घनिष्ठ मित्रता और प्रेम बराबर वालों में किया जाना चाहिए. देश काल और समाज का हर व्यक्ति पर गहरा प्रभाव होता है. ऐसे में अलग परिवेश एवं सामाजिक व आर्थिक अंतर वाले लोगों से प्रेम और मित्रता से बचना ज्यादा सही है. बराबर की संस्कृति और आर्थिकी वाले लोग एक दूसरे की समस्याएं और जरूरतों को भलिभांति समझते हैं. समझ का यह स्तर रिश्तों को प्रगाढ़ बनाता है. अत्यधिक सामाजिक और आर्थिक अंतर रहन-सहन, बात व्यवहार और सोच में खाई जैसे अंतर को दर्शाते हैं. व्यक्ति की मानसिकता उसके चरित्र का निर्माण करती है. चारित्रिक अंतर झगड़े विवाद बहस और तनाव का कारण बन सकता है. आचार्य चाणक्य व्यक्तिगत संबंधों के साथ राजनीतिक व्यवहार में भी चरित्र को अधिकाधिक महत्व देते थे. कमजोर चरित्र और व्यवहार के लोगों पर भरोसा नहीं करते थे. प्रेम और मित्रता में भरोसा प्राथमिक तत्व होता है. भरोसा समान विचारधारा और संस्कृति के लोगों में विकसित होता है. चाणक्य ने न केवल विभिन्न राजनैतिक संबंधों को देशकाल की जरूरत के अनुसार महत्ता प्रदान की बल्कि स्वयं इनको मूर्तरूप देने की पहल की. इनमें उन्होंने हमेशा इस बात का ध्यान रखा कि प्रेम और मित्रता से निर्मित रिश्ता बराबर वालों के साथ ही हो.
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