रायपुर । राजधानी में जमीन से जुड़े कई खेल इन दिनों फलफूल रहे हैं, लेकिन जमीन के मामलों में हेरा-फेरी वही समझा सकता है जो राजस्व अभिलेखों की समझ रखे और भू-राजस्व संहिता को जुबानी जाने। इसके जानकार आज की तारीख में राजधानी में अंगुलियों में गिने जा सकते हैं। प्रदेश में जब से राजस्व अभिलेखों की दुरूस्ती ऑनलाइन की गई है तब से पटवारी अवैध उगाही के लिए बिल्ली के समान झपट्टा मारने को उतारू रहते हैं। ऐसा ही एक मामला रायपुर के सबसे पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग और रिंग रोड का सामने आया है, जिसमें पटवारी ने बगैर किसी अधिकारी को जानकारी दिए परिवर्तित भूमि को कृषि भूमि में दर्ज कर दिया। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब भू-स्वामी ने परिवर्तित भूमि का दस्तावेज राजस्व न्यायालय में कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया।
राजस्व न्यायालय में प्रस्तुत आवेदन पर जब नायब तहसीलदार अश्वनी कंवर ने कार्रवाई करनी शुरू की और पटवारी जागेश्वर चन्द्राकर से रिपोर्ट तलब किया, तब पटवारी ने उसी भूमि का कृषि भूमि के रूप में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसकी जब विवेचना की गई तब पता चला पटवारी ने बगैर किसी आदेश के सरकार के राजस्व अभिलेख में फेरबदल किया है। इसकी जानकारी जब पटवारी से तलब की गई तो पटवारी चन्द्राकर ने आवेदन प्राप्ति के पूर्व ही अभिलेख दुरूस्ती की जानकारी दी। पटवारी को जब अभिलेख पुन: की भांति दुरूस्त करने कहा गया, तो पटवारी ने नायब तहसीलदार से आदेश की मांग की। जब पूरे प्रकरण पर नायब तहसीलदार ने सुनवाई के बाद दुरूस्ती आदेश जारी किया, इसके बाद से अब तक पटवारी भूमि का अभिलेख दुरूस्ती करने से कतरा रहा है।
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