रायपुर। संतोषी नगर के दिलीप दीप हो या पेंशनबाड़ा का बबलू खान, भिलाई के योगेश हो या नवापारा राजिम में रहने वाले राधे तांडी। ये सभी श्रमिक है। इनकी दिनचर्या की शुरुआत प्रातः 5 से 6 बजे ही शुरू हो जाती है। भले ही इन मजदूरों को रात में सोने से पहले आने वाले दिन में काम मिलने को लेकर चिंता होती होगी, लेकिन उन्हें इस बात की गारंटी होती है कि कल की सुबह वह खाली पेट नहीं रहेगा। मजदूर भलीभांति जानते हैं कि चावड़ी में काम धंधा मिले न मिलें, उन्हें भरपेट भोजन जरूर मिलेगा। निर्धारित स्थान पर बहुत कम दर पर भोजन मिलने से मजदूरों को सुबह- सुबह घर पर भोजन की चिंता नहीं रहती। इससे उन्हें अपने कार्य स्थल पर जाने में भी विलम्ब नहीं होता। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और श्रम मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया के निर्देशन में श्रम विभाग द्वारा संचालित शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना हजारों गरीब मजदूरों के लिए वरदान साबित हो रही है।

