जब उम्मीदवारों का ये हाल तो आम मतदाता का क्या होगा…?
रायपुर। छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज की चुनावी व्यवस्था बदहाल होता नजर आ रहा है। समाज के निर्वाचन अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा जिस हिसाब से निर्वाचन की व्यवस्था की जा रही है उसे देख कर तो लगता है कि सब कुछ भगवान भरोसे हो रहा है। समाज के चुनाव अधिकारी द्वारा कहा जाता है कि किसी भी प्रत्याशी को मतदान केन्द्रों की सूची की जानकारी नहीं दूंगा, इस संवाददाता ने जब मतदान केन्द्रों की सूची संबंधी जानकारी के लिए संपर्क किया तो उनके द्वारा कहा गया कि मतदान केन्द्रों की सूची संबंधी जानकारी मैं आपको नहीं दूंगा और ना ही मैं किसी भी प्रत्याशी को इसकी जानकारी नहीं दूंगा। जब इस बात की जानकारी चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को हुई तो उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि हमें मतदान दिवस के दिन बूथ एजेंट की व्यवस्था करनी है और इसके लिए बूथों की सूची होना आवश्यक है। लेकिन मतदान केन्द्रों की सूची सार्वजनिक नहीं किया जाना समझ से परे है। समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार उमाकांत वर्मा से जब इस संबंध में हमने उनका पक्ष जानने का प्रयास किया तो उन्होंने कहा कि मुझे मतदान केन्द्रों की सूची के संबंध में कोई जानकारी नहीं है, जबकि होना तो यह चाहिये कि मतदान केन्द्रों की सूची सार्वजनिक की जाये। इसी कड़ी में चोवाराम वर्मा, लक्ष्मी वर्मा से संपर्क किया गया तो इन दोंनों का भी यही कहना है कि हमें मतदान केन्द्रों की सूची के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। जबकि होना तो यह चाहिये कि समाज के मुख्य चुनाव कार्यालय के सूचना पटल पर मतदान केन्द्रों की सूची को चस्पा किया जाना चाहिये जिससे कि समाज के आम मतदाता को मतदान केन्द्रों की सूची की जानकारी हो सके ताकि मतदान वाले दिन उन्हें भटकना नहीं पड़े। आपकों बता दें कि प्रत्याशियों में से कुछ ऐसे भी प्रत्याशी है जिन्हे इसकी जानकारी है। मतदान केन्द्रों की सूची की जानकारी कुछ प्रत्याशियों को होने से इससे ऐसा प्रतीत होता है कि इस बार भी ग्राम असौंदा में जिस प्रकार से पिछला चुनाव में षडयंत्र किया गया था, उसी प्रकार बदहाल निर्वाचन व्यवस्था को देखते हुए इस चुनाव में भी षडयंत्र की बू आ रही है। समाज के बदहाल निर्वाचन व्यवस्था के आगे उम्मीदवार बेबस नजर आ रहे हैं। और मतदान केन्द्रों की सूची सार्वजनिक नहीं होने से उम्मीदवारों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। ऐसा लगता है कि समाज के भीतर मौजूद कुछ लोग स्वार्थवश अपनी रोटी सेंकने में लगे हुए है और समाज के आम मतदाता की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि होना तो यह चाहिये कि समाज के मुख्य चुनाव कार्यालय के सूचना पटल पर बकायदा निर्वाचन कार्यों से संबंधित समस्त जानकारी चस्पा किया जाना चाहिये, जिससे कि जब समाज के भीतर लोकतांत्रिक परंपरा शुरु की गई उसे बरकरार रखा जा सके।
