पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 12 मार्च से होने जा रहा है. इस अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इस दिन व्रत रखकर पूजा करने से कई प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है. अमावस्या की पूजा शनिवार के दिन की जाएगी. शनिवार का दिन होने के कारण इस अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है. फाल्गुन अमावस्या को की जाने वाली पूजा से जीवन में सुख और शांति प्राप्त होती है. इस अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म भी किया जाता है. इस दिन स्नान और दान का भी विशेष फल बताया गया है.
शनि ग्रह की शांति होती है
शनिवार के दिन अमावस्या की तिथि पडऩे के कारण इस दिन शनि देव की पूजा करने से विशेष शांति होती है. जिन लोगों के जीवन में शनि से जुड़ी कोई परेशानी आ रही है वे इस दिन विधि पूर्वक शनिदेव का उपाय करें. लाभ मिलता है. इस दिन शाम के समय शनि मंदिर में शनि देव की पूजा करने से पुण्य प्राप्त होता है. जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या चल रही उन्हें इस दिन शनिदेव की पूजा से लाभ मिलता है.
राहु और केतु से बनने वाले दोष दूर होते हैं
जन्म कुंडली में राहु और केतु का अशुभ ग्रह माना गया है. राहु केतु से निर्मित होने वाला कालसर्प दोष और पितृदोष व्यक्ति को परेशानियां प्रदान करता है. इसलिए इस दिन इन ग्रहों की भी शांति के लिए उपाय करना उत्तम माना गया है.
शनि अमावस्या शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि आरंभ: 12 मार्च,शुक्रवार दोपहर 3 बजकर 5 मिनट से
अमावस्या तिथि का समापन: 13 मार्च, शनिवार दोपहर 03 बजकर 51 मिनट पर
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