पूर्व राजप्रधान खोड़शराम कश्यप

रायपुर। छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज का चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है। समाज के बलौदाबाजार राज में चुनावी गदर मचा हुआ है। यहां एक राजप्रधान पद के प्रत्याशी नरेन्द्र कश्यप का निर्वाचन रद्द करने की मांग की गई है। पूर्व राजप्रधान खोड़शराम कश्यप ने मामला उठाते हुए इस संबंध में समाज के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखा गया है। चुनाव अधिकारी को लिखे पत्र में पूर्व राजप्रधान खोड़श राम कश्यप ने विस्तार पूर्वक आचार संहिता एवं विधान के धारा 20 का पालन नहीं होन की जानकारी देते हुए विस्तारपूर्वक लिखा है कि बलौदाबाजार राज के राजप्रधान प्रत्याशी वर्ष 2016 से 2018 तक पलारी राज के राजप्रधान के रूप में निर्वाचित हुए थे परंतु बीच में राज विभाजन के बाद देवकराम वर्मा पलारी राज के कार्यवाहक राजप्रधान के रूप में तथा नरेन्द्र कश्यप बलौदाबाजार राज के पूर्णकालिक राजप्रधान के रूप में कार्यकाल पूर्ण किया है। फिर चुनाव पश्चात पलारी राज के राजप्रधान देवकराम वर्मा एवं बलौदाबाजार राज के राजप्रधान नरेन्द्र कश्यप पुन: निर्वाचित हुए। इस प्रकार नरेन्द्र कश्यप लगातार दो बार राजप्रधान के रूप में लगातार कार्य कर चुके है। इसके बाद भी लगातार तीसरी बार नरेन्द्र कश्यप का राजप्रधान के पद भर भरे हुए नामांकन को आपके द्वारा वैध करार देते हुए चुनाव लडऩे की अनुमति देना छग मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के आचार संहिता व विधान के धारा 20 का खुला उल्लंघन है। महोदय बलौदाबाजार राज के चांपा राज अधिवेशन में तीसरी बार अवसर नहीं देने की बात उठाई गई थी। जिसे महामंत्री ललित बघेल द्वार मंच को आश्वस्त किया गया था कि निर्वाचन अधिकारी द्वारा आचार संहिता के नियमों का पालन करते हुए उचित निर्णय लिया जायेगा, परंतु आपके द्वारा एक तरफा निर्णय लेकर विधान के विपरीत नरेन्द्र कश्यप को लगातार तीसरी बार राज प्रधान के पद पर चुनाव लडऩे का अवसर प्रदान करना विधान के साथ खिलवाड़ है। केन्द्रीय कार्यकारिणी द्वारा जैसा कि महामंत्री ललित बघेल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार नरेन्द्र कश्यप को तीसरी बार राजप्रधान के पद पर चुनाव लडऩे व तिल्दा राज के राजप्रधान श्रीमती राधिका वर्मा को उनके कार्यकाल के अंतिम
वर्ष में महाधिवेशन होने की स्थिति में एक वर्ष तक उनके कार्यकाल को बढ़ाये जाने का निर्णय लिया गया है। परंतु महाधिवेशन एवं राज अधिवेशनों में विरोध के बाद विधान में प्रावधान होने के बाद भी तिल्दा राज के राजप्रधान का चुनाव आनन-फानन में कराये जाने का निर्णय लिया जाना और किसी राजप्रधान को लगातार दो बार ही राजप्रधान रहने का प्रावधान धारा 20 में होने के बाद भी उनके नामांकन निरस्त ना कर तीसरी बार चुनाव लडऩे की अनुमति देना पुरी तरह से अवैधानिक एवं पक्षपातपूर्ण है। साथ ही आपके द्वारा निर्वाचन अधिसूचना जारी करने के बाद विभिन्न राज अधिवेशनों में अपने आप को केन्द्रीय अध्यक्ष व राजप्रधान प्रत्याशी घोषित कर चुके लोगों के साथ जगन्नाथ पूरी यात्रा जाना फोटो शेयर करना नैतिकता के खिलाफ है जिससे निर्वाचन की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हो रहा है। अत: संविधान की रक्षा करने हेतु नरेन्द्र कश्यप की निर्वाचन को रद्द करें अन्यथा अच्छा होगा कि आपको निर्वाचन अधिकारी के पद से इस्तीफा देकर निष्पक्षता एवं नैतिकता का परिचय दें।

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