साल 2020 में वो मार्च का ही महीना था जब भारत में कोरोना वायरस के मामलों ने रफ़्तार पकड़नी शुरू कर दी थी.

होली के ठीक बाद स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए थे और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी रोक लग गई थी.

लगभग एक साल गुजर जाने पर इस बार फिर होली आने वाली है और कोरोना का प्रकोप एक बार फिर बढ़ गया है.

पिछले एक साल में कोरोना के मामले नौ हज़ार तक भी पहुंचे और लगने लगा कि जैसे कोरोना का अंत आ गया है.

लेकिन, पिछले एक महीने में कोरोना वायरस के मामलों ने फिर से रफ़्तार पकड़ ली है जिसे भारत में कोरोना की दूसरी लहर कहा जा रहा है.

कई जगहों पर लॉकडाउन

26 मार्च को देशभर में कोरोना वायरस के 59,118 मामले सामने आए हैं और 257 लोगों की मौत हो चुकी है.

अब तक कोरोना के एक करोड़ 18 लाख से ज़्यादा मामले आ चुके हैं और चार लाख 21 हज़ार से ज़्यादा एक्टिव मामले हैं.

कई जगहों पर लॉकडाउन लगा दिया गया है. टीकाकरण अभियान तेज़ किया जा रहा है और मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों के पालन के लिए जोर दिया जा रहा है.

इसी बीच 29 मार्च को होली है और सरकारें अलर्ट पर आ गई हैं. पहले भी त्योहार के बाद कोरोना वायरस के मामलों में तेज़ी देखने को मिली है.

पिछले साल अक्टूबर और नवंबर में नवरात्रों और दीवाली के दौरान कोरोना वायरस के मामले बढ़ने लगे थे.

कोरोना महामारी की दूसरी लहर और कोविड-19 के नए वैरिएंट्स के बीच होली के दौरान बरती गईं असावधानियां कोरोना से निपटने में चुनौती बन सकती हैं.

डॉक्टरों का कहना है कि हमें पुराने अनुभवों से सीखना चाहिए और समारोहों में जाकर सुपरस्प्रेडर बनने से बचना चाहिए.

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