रायपुर। रंगो के पर्व होली में खुशियां बिखेरने में रंग और गुलाल का विशेष महत्व है किन्तु रसायनों से निर्मित रंग और गुलाल स्वास्थय के लिए हानिकारक होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी नुकसानदेह होते हैं होली के पर्व को सुरक्षित और सेहतमंद बनाने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए प्राकृतिक वनस्पतियों से विभिन्न रंगों के हर्बल गुलाल बनाने की शुरूआत की गई है। कृषि विश्वविद्यालय के अन्तर्गत संचालित 15 कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा स्व-सहायता समूहों के माध्यम से हर्बल गुलाल का निर्माण एवं विक्रय किया जा रहा है। इन कृषि विज्ञान केन्द्रों के मार्गदर्शन में विभिन महिला स्व-सहायाता समूह की महिलाओं ने 54 क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार किया है जिसमें 25 क्विंटल हर्बल गुलाल के विक्रय से इन समूहों ने पौने सात लाख रूपये की आय अर्जित की है।
हर्बल गुलाल ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बिखेरे खुशहाली के रंग
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