उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के करन छपरा गांव के 45 साल के हाथी सिंह ने बचपन में ही शपथ खा ली थी कि कभी शादी नहीं करूंगा. लेकिन अपनी ढलती उम्र और शपथ को तोड़कर हाथी सिंह ने आखिरकार ऐसे महीने में चट मंगनी-पट ब्याह कर लिया. जब रीति-रिवाज के मुताबिक शादी करने की इजाजत नहीं है. खरमास में आनन-फानन में शादी रचानेवाले हाथी सिंह ने जो वजह बताई है वो जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे. एक दशक तक समाज सेवा करने के बाद ग्राम प्रधान बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए शादी नहीं करने की शपथ ले चुके हाथी सिंह नाम के शख्स ने शादी इसलिए रचा ली कि उनकी पंचायत सीट महिला के लिए आरक्षित घोषित हो गई थी. बलिया जिले के करन छपरा गांव के निवासी हाथी सिंह ने बताया कि उन्होंने साल 2015 में प्रधानी का चुनाव लड़ा और वह उपविजेता ही रहे. हाथी सिंह को इस बार उम्मीद थी कि इसबार उन्हें सीट जरूर मिलेगी और वे जरूर प्रधानी का चुनाव जीतेंगे. लेकिन, उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया और वह सीट महिलाओं के लिए आरक्षित घोषित कर दी गई है. ये खबर उनके सपनों पर दुखों का पहाड़ टूटने जैसा था और उनकी प्रधानी की सीट जीतने की उम्मीद टूट गई. इससे दुखी हुए हाथी सिंह को उनके समर्थकों ने सुझाव दिया कि वह शादी कर लें तो उनकी पत्नी इस सीट पर चुनाव लड़ सकती हैं और इस तरह से उनका सपना भी पूरा हो सकता है. हाथी सिंह को ये सुझाव भा गया और उन्होंने शादी की शपथ को दरकिनार कर आखिरकार 26 मार्च को गांव के ही धर्मनाथजी मंदिर में शादी कर ली. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने विवाह भी खर-मास के दौरान किया गया, जो हिंदू परंपराओं के अनुसार शुभ नहीं माना जाता है. शादी के बाद उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल को नामांकन से पहले शादी करनी थी, इसलिए आनन-फानन में शादी का आयोजन किया गया. बता दें कि हाथी सिंह की दुल्हन अभी स्नातक स्तर की पढ़ाई कर रही है और अब ग्राम पंचायत चुनाव लडऩे के लिए तैयार है.

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