रायपुर। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने शिक्षा सचिव को पत्र लिख यह बताया है कि छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग और डीपीआई ने ट्यूशन फीस परिभाषित नहीं किया और छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम 2020 में जो फीस की परिभाषा दिया, उसमें प्रायवेट विद्यालयों को किसी भी नाम से फीस लेने की छुट दे दिया, लेकिन शिक्षा का अधिकार कानून के प्रावधानों के अनुसार विद्यालयों को डोनेशन नहीं लेना है और डोनेशन और लेट फीस पर आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार छुट नहीं दिया जाता है। श्री पॉल का कहना है कि केन्द्रीय कानून और छत्तीसगढ़ फीस अधिनियम को लेकर आम जनता में बहुत भ्रांतियां है। शिक्षण शुल्क या ट्यूशन फीस और प्रायवेट विद्यालयों में ली जा रही फीस को लेकर पालकगण परेशान है, क्योंकि पालकों को यह नहीं समझ आ रहा है कि उन्हें प्रायवेट विद्यालयों के द्वारा फीस के नाम से लूटा जा रहा है और उसके समाधान का कोई प्रयास सरकार द्वारा क्यों नहीं किया जा रहा है और राज्य सरकार फीस को लेकर एक सुस्पष्ट परिभाषा क्यों नहीं दे रही है। श्री पॉल ने बताया कि कई प्रायवेट विद्यालयों के द्वारा स्कूल और संस्था दोनों एकाउंट में पैसे लिए जा रहे है। स्कूल एकाउंट में फीस और संस्था के एकाउंट में डोनेशन लिया जा रहा है और इस प्रकार पालको को सुनियोजित ढंग से लुटा जा रहा है।
पॉल ने शिक्षा सचिव से पूछा है:-
0 क्या प्रायवेट विद्यालयों को किसी भी नाम से फीस लेने की छुट देना केन्द्रीय कानून का उल्लघंन तो नहीं है?
0 प्रायवेट विद्यालयों को दो एकाउंट में पैसे लेने की अनुमति किसने दिया है?
0 क्या प्रायवेट विद्यालयों को मदवार फीस लेना अनिवार्य नहीं है?
केन्द्रीय कानून और छत्तीसगढ़ फीस अधिनियम को लेकर आमजनता में बहुत भ्रांतियां
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