राहु और केतु को छाया ग्रह कहा गया है. राहु और केतु जन्म कुंडली में अलग अलग फल प्रदान करते हैं. आज हम बात करेंगे सिर्फ राहु की. राहु का प्रभाव व्यक्ति पर किस तरह से पड़ता है? राहु कब शुभ और अशुभ होता है, इस बारे में भी जानेंगे. लेकिन सबसे पहले जानते हैं-
राहु का स्वभाव
राहु को एक रहस्मय ग्रह माना गया है. राहु को राजनीति, कूटनीति, साहस, लेखन, इंटरनेट आदि का भी कारक माना गया है. राहु की प्रवृत्ति कुछ हद तक शनिदेव की तरह ही मानी गई है. गलत कार्यों को करने पर राहु जीवन में हानि और अपयश भी प्रदान करता है. राहु जीवन में अचानक होने वाली शुभ अशुभ घटनाओं का कारक माना गया है. राहु प्रधान व्यक्ति हठी, मौलिक विचार और लीक से हटकर कार्यों को करने के लिए भी प्रेरित करता है. ऐसे व्यक्ति आसानी से हार नहीं मानते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बिना थके आगे बढ़ते रहते हैं.
राहु की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार राहु और केतु स्वर्भानु नाम के राक्षस के दो भाग हैं. पहला भाग यानि सिर राहु और धड़ वाले हिस्से को केतु माना गया है. स्वर्भानु नाम का राक्षस कैसे राहु और केतु बन गया इसकी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है. असुरों और देवताओं के बीच जब समुद्र मंथन की प्रक्रिया चल रही थी तब उसमे से एक अमृत का कलश भी निकला था. जिसे पीने के लिए देवताओं और असुरों में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है. विवाद को दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया और देवताओं को अमृत पान कर दिया. स्वर्भानु वेश बदलकर देवताओं के साथ बैठ गया और अमृत पीने में सफल हो गया, लेकिन सूर्य और चंद्रमा ने इस बात की जानकारी भगवान विष्णु को दे दी. भगवान विष्णु ने सुर्दशन चक्र से तुरंत ही स्र्वभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया, लेकिन अमृत पी लेने के कारण वह अमर हो गया और सिर वाला हिस्सा राहु और धड़ का हिस्सा केतु कहलाया. चंद्रमा और सूर्य द्वारा चुगली किए जाने के कारण ही राहु और केतु चंद्रमा और सूर्य से बैर मानते हैं और चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण की स्थिति पैदा करते हैं.
राहु का उपाय
राहु जब अशुभ होता है तो हर कार्य में बाधा उत्पन्न करता है. अन्य ग्रहों की दृष्टि से भी राहु के प्रभावों में परिवर्तन आता है. राहु मानसिक तनाव, अपयश, नशा, वाणी दोष जैसी समस्याएं भी देता है. राहु को शुभ बनाने के लिए इन उपायों का करना चाहिए-
भगवान शिव और कालभैरव की पूजा करने से राहु शांत होता है.

  • रसोई घर में बैठकर भोजन करें
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें.
  • गलत कार्यों से दूर रहें.
  • संगत को ठीक रखें.
  • नशा आदि न करें.
  • झूठ, छल और कपट से दूर रहें.
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