रायपुर। कोरोना काल में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की सदस्य कमला बाजपाई के कुशल मार्गदर्शन में नियमित शिक्षको की क्षमताबृद्धि के लिए आनलाइन विमर्श का आयोजन किया जा रहा हैं, इसी कड़ी में 17 अप्रैल को पैनल डिस्कशन द्वारा शिक्षक समूह के बीच कोरोना महामारी के मिथक एवं वैज्ञानिक सोच पर गहन चर्चा की गई । इस चर्चा में भाग लेने के लिए 4 पैनलिस्ट को आमंत्रित किया गया था चंचल शुक्ला, भारती शुक्ला, ऋषिका झा एवं स्वाति पांडेय सभी शिक्षिकाओं ने इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए कि किस प्रकार समाज में कोरोना वैश्विक महामारी को लेकर काफी ज्यादा मिथक सामाजिक सोच सर्वव्यापी हो रहे हैं जिससे बहुत सारे लोग कोरोना को लेकर पैनिक वाली स्थिति में पहुंच चुके हैं। वहीं पर शिक्षकों द्वारा इसके पीछे छुपे हुए वैज्ञानिक सोच पर गहन विचार विमर्श किया गया। तथा आजकल जन समुदाय के बीच कोविड-19 संबंधी समाज में मैसेज फॉरवर्ड करने का जो दौर चल रहा है जिसके पीछे क्या वैज्ञानिक तर्क है इसे जाने बगैर कि लोग इसे आगे फॉरवर्ड कर देते हैं इस पर काफी गहन विचार किया गया साथ ही अन्य शिक्षकों के द्वारा पैनलिस्ट से कोरोना संबंधी प्रश्न पूछे गए जिसका उन्होंने उत्तर पैनलिस्ट के द्वारा भी दिया गया। इसमें सभी जिलों के कुल 30 शिक्षक शिक्षिकाओं ने भाग लिया।
इसमें विवेकानंद दिल्लीवार, के शारदा, श्रद्धा शर्मा, जयंती खमारी, गायत्री पाली, संध्या बंजारे, सरिता स्वर्णकार, ज्योति बंजारे, भारतीय शुक्ला, धर्मशिला गुप्ता, कविता वर्मा, श्रवण कुमार यादव, कमल कांत साहू, कृष्णा तिवारी, कविता साहू, बी यदु, प्रीति सांडिल्य, इमला यदु, गायत्री जांगड़े, मुकेश साहू आशा यादव आदि शिक्षकों ने भी हिस्सा लिया।
कोरोना महामारी के मिथक सामाजिक सोच एवं वैज्ञानिक सोच पर पैनल डिस्कशन
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