कहते हैं कि एक माँ वह होती है जो अन्य सभी की जगह ले सकती है, लेकिन कोई भी उसकी जगह नहीं ले सकता है और हम सभी जानते हैं कि यह एक स्व-स्पष्ट सत्य है। जिस दिन से बच्चा इस संसार में जन्म लेता है और जब तक वह अंतिम सांस लेती है उस दिन तक वह सिर्फ और सिर्फ अपने बच्चे के लिए ही जीती है। बच्चे को पहले दिन से ही खाना खिलाने, उसका गुस्सा सहना, उसके दुःख-दर्द को अपना समझना, ज़रुरत के वक्त उसका मार्गदर्शन करना माँ का कर्तव्य है और वह अपने इस कर्त्तव्य का निर्वाह भी बहुत ही शालीनता से करती है। हम समय के साथ बड़े होते जाते हैं और कभी-कभी माँ के साथ दुर्व्यवहार भी करते हैं लेकिन माँ का प्यार कभी भी नहीं बदलता है। दुनिया के लिए व्यक्ति कितना भी बड़ी हो जाये लेकिन एक माँ के लिए उसकी संतान हमेशा ही छोटी रहती है। माँ के ऐसे अटूट प्यार को व्यक्त करने के लिए हम हर साल मई माह के दूसरे रविवार को Mother’s Day | मदर्स डे मनाते हैं। मई के दूसरे रविवार को हम मातृ दिवस या मदर्स डे के रूप में मानते हैं ऐसे तो माँ के लिए साल के 365 दिन भी न्योछावर कर दिए जाए तो वो भी कम हैं लेकिन साल में एक दिन तो हम अपनी माँ को स्पेशल फील करा सकते हैं, उन्हें यह बता सकते हैं हैं कि वह हमारी ज़िन्दगी का कितना ही जरुरी हिस्सा हैं, उनके बिना हम कुछ भी नहीं। आज हम जो भी हैं सिर्फ उनके कारण ही हैं।

कहने को “माँ” एक बहुत ही छोटा सा शब्द लेकिन यह अपने ही अंदर हज़ारों सीख छुपाये बैठा है। माँ जो एक औरत का रूप होती है जो वक़्त आने पर कभी दुर्गा , कभी काली तो कभी सावित्री बन जाती है। वैसे तो इस सृष्टि का निर्माण भगवान ने किया पर उसके सृजन के उसने सबसे पहले माँ बनायी, माँ का अस्तित्व न कभी कम था और न कभी कम होगा। माँ का जीवन अपने आप में एक कहानी है। हम सब कुछ भी कर लें लेकिन माँ के बराबर कभी नहीं पहुँच सकते।

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