रायपुर। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया बिहार के जमुई जिले के सिमुलतला थाना क्षेत्र में डायन के अंधविश्वास में इंटर-मैट्रिक की छात्राओं की बेरहमी से पिटाई की गई है। दोनों छात्राओं पर ग्रामीण दबाव बना रहे थे कि वह एक मृत बच्चे को जिंदा कर दे। डॉ मिश्र ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए बिहार सरकार से इस मामले में कड़ी कार्यवाही की मांग की है. डॉ दिनेश मिश्र ने कहा कहने को तो हम 21वीं सदी में हैं, लेकिन आज भी जादू टोना, डायन,टोनही,के सन्देह में महिलाओं के साथ होने वाली प्रताडऩा की खबरें आती है. बिहार में जमुई जिले के सिमुलतला थाना क्षेत्र में डायन के सन्देह में अंधविश्वास में फंसकर गांव वालों ने मैट्रिक-इंटर में पढ़ रही दो छात्राओं के साथ 25 मई की रात ऐसी निर्ममता बरती, जो सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक है. सिमुलतला थाने के पास गादी टेलवा गांव में राकेश साह के पांच महीने के बेटे सत्यम की बीमार होने से मृत्यु हो गई। बच्चे की अचानक मौत से घबराए परिजन उस बच्चे का शव लेकर तांत्रिक के पास पहुंचे। तांत्रिक ने उन्हें बताया कि इस बच्चे की हत्या किसी गांव की किसी डायन ने की है। तांत्रिक ने सलाह दी कि बच्चे के शव को गांव के बाहर नदी के किनारे रेत में दबा दो। जिस डायन ने इसकी जान ली है वह जरूर उसे खाना खिलाने के लिए रात में वहां आएगी। बच्चे को दफनाने के बाद तांत्रिक की सलाह पर गांव के कुछ लोग नदी के पास निगरानी करते बैठे रहे. तभी रात में नदी किनारे दो लड़कियां जाती हुई दिखीं। लड़कियों को देखते ही गांव वालों ने उसे पकड़ लिया और बंधक बनाकर गांव ले आए। इसके बाद दफनाए गए बच्चे को भी निकालकर घर ले आया गया और दोनों लड़कियों पर दबाब बनाया जाने लगा कि वह इसे जिंदा करे।

लड़कियों ने बताया कि वह बगल के गांव घांसीतरी की हैं और शौच करने नदी किनारे आई थीं। लेकिन बच्चे की मौत से आहत और तांत्रिक के फैलाए भ्रम और अंधविश्वास में पड़कर ग्रामीणों ने दोनों लड़कियों के कपड़े फाड़ दिए और बाल काट दिए। इसके बाद जिसे जो मिला उसी से दोनों लड़कियों की पिटाई शुरू कर दी। वह विनती करती रहीं कि उन्हें बच्चे की मौत के बारे में कुछ नहीं पता लेकिन एक ना सुनी गई और ग्रामीणों की पिटाई से उन बच्चियों को काफी चोटें लगी हैं. बारिश में बीच सड़क पर दोनों ही देर तक भींगती रहीं. वहां मौजूद भीड़ इस दौरान तमाशबीन बनी रही. पर किसी व्यक्ति ने उन्हें बचाने का प्रयास नहीं किया. इस घटना की जानकारी जब पुलिस को दी गयी और पुलिस गादी टेलवा गांव पहुंची, तो ग्रामीणों ने उन्हें कार्यवाही न करने दिया। इसके बाद जवानों की अतिरिक्त टीम बुलाकर दोनों लड़कियों को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाया गया और उन लड़कियों को इलाज के लिए झाझा भेज दिया गया . साथ ही गांव के 11 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। पर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है । जानकारी मिली है कि दोनों लड़कियां चचेरी बहन हैं, जो ग्रामीणों के अंधविश्वास का शिकार हो गयी है. डॉ . दिनेश मिश्र ने कहा कोई नारी डायन /टोनही नही होती. जादू टोने का कोई अस्तित्व नहीं होता .यह सिर्फ अंधविश्वास है, इस प्रकार किसी भी निर्दोष को प्रताडि़त करना शर्मनाक तथा अपराध है. हमारी बिहार सरकार से मांग है कि इस मामले में शामिल अन्य सभी दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए उन्हें कड़ी सजा मिले, तथा निर्दोष प्रताडि़त छात्राओं को न्याय, मुआवजा मिल सके.

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