रायपुर। छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज में इन दिनों चुनाव को लेकर गदर मचा हुआ है। समाज के वर्चुअल बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार कोरोना महामारी का हवाला देते हुए चुनाव को टाल दिया गया है। समाज का चुनाव टाले जाने के बाद जबर्दस्त आक्रोश देखा जा रहा है। वर्चुअल बैठक के बाद चुनाव को लेकर महीनों से मेहनत कर रहे केन्द्रीय अध्यक्ष एवं 6 राज के राजप्रधान पद के प्रत्याशियों के किये कराये पर एक बार फिर पानी फिर गया है। समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष उमाकांत वर्मा एवं चोवाराम वर्मा के नेतृत्व में समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. रामकुमार सिरमौर के खिलाफ जबर्दस्त मोचा खोल दिया है। उमाकांत वर्मा और चोवाराम वर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज में छह राजप्रधान और केंद्रीय अध्यक्ष के चुनाव 13 मार्च को पूर्व में घोषित किया गया था किंतु केंद्र के टालमटोल रवैया से उसको 4 अप्रैल कर दिया गया है। पश्चात उसे भी कोविड-19 का बहाना बनाते हुए आगे बढ़ा दिया गया। वर्तमान में कार्यकारी केंद्रीय अध्यक्ष और कार्यकारी 6 राजप्रधान के सम्मिलित वर्चुअल बैठक के अनुसार पुन: नगरी निकाय चुनाव के समय चुनाव करवाने का ऐलान किया गया है जिससे समाज में आक्रोश व्याप्त है तथा समाज के प्रमुखों द्वारा उक्त कार्य प्रणाली विधि सम्मत नहीं होने का आरोप लगाया गया है। जिसमें कहा गया है कि कार्यवाहक केंद्रीय अध्यक्ष एवं कार्यवाहक राज प्रधान को कोई भी नीतिगत निर्णय लेने का संविधान में प्रावधान नहीं है। केवल चुनाव प्रभारी ही प्रत्याशियों के अभिमत से चर्चा कर निर्णय ले सकते हैं जिसका पालन वर्तमान में नहीं किया गया है। उक्त असंवैधानिक निर्णय के संबंध में सर्वश्री चोवाराम वर्मा, उमाकांत वर्मा, लक्ष्मी वर्मा केंद्रीय अध्यक्ष प्रत्याशी तथा भुनेश्वर वर्मा राज प्रधान अर्जुनी राज, दशरथ वर्मा राज प्रधान धरसीवा राज, रूद्र कुमार वर्मा पूर्व केंद्रीय महामंत्री , रघुनंदन लाल वर्मा पूर्व राज प्रधान,खोडराम कश्यप पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष, टेशु लाल धुरंधर, देवेश वर्मा, धर्मेंद्र सरसीहा, ज्ञानेशु राज प्रधान प्रत्याशी, सुरेश वर्मा, श्रीमती दुलारी वर्मा, श्रीमती कांति वर्मा राज प्रधान प्रत्याशी , शिव कुमार वर्मा, दिनेश वर्मा, बृजलाल वर्मा, ठाकुर राम वर्मा, बीआर प्रगनिहा, चेतन वर्मा, पूनम वर्मा, भक्त भूषण चंद्रवंशी, टिकेंद्र, जितेंद्र, चंद्रहास पाटन, पोषण वर्मा, अरुण वर्मा, दिनेश वर्मा धमधा, मिथिला खिचरिया भिलाई, शांति वर्मा, सदा नंदिनी वर्मा, हेमंत वर्मा सामने आये है जिन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया है।
