रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने मुख्यमंत्री मंत्री भूपेश बघेल सरकार के बीते ढाई वर्ष को पेंशनरों के लिए बेकार निरूपित करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद पेंशनरों हित मे लगभग इन 20 वर्षो में किसी सरकार ने कुछ नहीं किया। ढाई साल पूर्व कांग्रेस सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार से पेंशनरों की बहुत आशाएं थी जो इन बीते ढाई वर्षो में पूरी तरह धरासाई हो गया है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से पेंशनरों की प्रमुख समस्या राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत पेंशनरी दायित्वों का बंटवारा और सेन्ट्रल पेंसन प्रोसेसिंग सेंटर स्टेट बैंक गोविदपुरा भोपाल की छत्तीसगढ़ राज्य में पृथक स्थापना है और अब तक दोनों ही समस्या जस के तस बनी हुई हैं। जिसमें पेंशनरी दायित्वों बंटवारा नही होने से हर आर्थिक भुगतान के लिये मध्यप्रदेश शासन से सहमति लेना अनिवार्य है। इसीतरह पीपीओ जारी होने के बाद हर प्रकरण को स्टेट बैंक भोपाल स्थित सीपीपीसी शाखा में भेजा जाना अनिवार्य है जिसके कारण पेंशन भुगतान में कई महीने विलम्ब हो जाता है। जारी विज्ञप्ति में पेन्शनर फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव एवं फेडरेशन के घटक संगठन के क्रमश: पेन्शनर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष यशवन्त देवान, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेन्शनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष आर पी शर्मा तथा राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष जयप्रकाश मिश्रा ने आगे बताया है कि भूपेश सरकार ने आज तक पेंशनरो के प्रतिनिधि मंडल को मिलने का अवसर नही दिया हमारी छठवें और सातवें वेतनमान के एरियर देने का मामला लटका पड़ा है और जुलाई 19 से 5त्न प्रतिशत केन्द्र के समान घोषित महँगाई राहत की राशि अटका रखे हैं जबकि इस राशि का भुगतान राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी उसी दिनाँक से राज्य के खजाने से प्राप्त कर रहे हैं जब से केन्द्र सरकार ने घोषित किया है। और तो और बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र के मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रही कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने जुलाई 19 से 5 प्रतिशत केन्द्र के समान घोषित महँगाई राहत की राशि को भी अटका कर रखे हुए हैं जबकि इस राशि का भुगतान राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को उसी दिनाँक से राज्य के खजाने से भुगतान कर रहे हैं जब से केन्द्र सरकार ने इसे घोषित किया है। इन स्थितियों से स्पष्ट हो जाता है कि भूपेश बघेल सरकार का ढाई साल पेंशनरों के लिये क्यों? बेकार है। यह भी उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ शासन के बीच पेंशनरी दायित्व के बंटवारे से मध्यप्रदेश सरकार को आर्थिक हानि होना है इसलिए मध्यप्रदेश शासन 20 वर्षो से टालती आ रही हैं और चूंकि दोनों ही राज्यों एक ही राजनीतिक दलों की सरकार होने से मिलीभगत के कारण मामलें का जानबूझकर निराकरण नही किया गया परन्तु अब मध्यप्रदेश में भाजपा की और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार होने के बाद बंटवारे का मामला क्यों लंबित है, समझ से परे हैं जबकि पेंशनरी दायित्वों का बंटवारा और स्टेट बैंक सीपीपीसी के छत्तीसगढ़ में स्थापना नहीं होने से छत्तीसगढ़ शासन को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

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