रायपुर। पं माधवराव सप्रे की 150 वीं जयंती समारोह का शुभारंभ करते हुए आज प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाएं हिंदी के लोकतंत्र की ताकत है। सप्रेजी ने हिंदी के माध्यम से भारत में नवजागरण का काम किया और स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत आधार दिया।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने संस्कृति विभाग के सहयोग से छत्तीसगढ़ मित्र और सहयोगी संगठनों द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार हिंदी का लोकतंत्र का शुभारंभ और छत्तीसगढ़ मित्र के जून अंक का विमोचन किया। उन्होंने कोलकाता की साहित्यकार डॉ कुसुम खेमानी को पं माधवराव सप्रे छत्तीसगढ़ मित्र साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया। श्री बघेल ने इस अवसर पर कहा कि हिंदी व्यापक भाषा समाज की भाषा है। क्षेत्रीय भाषाएं जनता की ताकत होती हैं। सप्रे जी ने अपनी पहली कहानी के माध्यम से सामंतवाद और अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ लोगों को जागरूक किया। आजादी के समय हिंदी के लोकप्रिय नारों ने जनता की नसों में क्रांति का संचार किया। लोकतंत्र का मजबूत आधार है हिंदी। सप्रे जी ने पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से धान का कटोरा छत्तीसगढ़ में नवजागरण की बुनियाद रखी । प्रदेश के संस्कृति मंत्री श्री अमरजीत भगत ने कहा कि साहित्यकार हर युग में सप्रेजी की तरह क्रांति ला सकता है। स्वतंत्रता के प्रति बोध कराने के लिए उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य को माध्यम बनाया।‌ श्री भगत ने राज्य सरकार द्वारा पं माधवराव सप्रे की पांडुलिपियों और समग्र साहित्य को प्रकाशित करने की घोषणा मुख्यमंत्री श्री बघेल की सहमति से की।
प्रारंभ में संयोजक डॉ सुधीर शर्मा ने समग्र सप्रे साहित्य की जानकारी दी और कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की सांस्कृतिक अस्मिता के जागरण के कारण छत्तीसगढ़ के महापुरुषों को समारोहपूर्वक याद किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ मित्र के संपादक डॉ सुशील त्रिवेदी ने स्वागत भाषण देते हुए हिंदी नवजागरण और सप्रे जी के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सप्रेजी की साहित्यिक पत्रकारिता ने बरसों तक समूची पत्रकारिता को प्रभावित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ से इसका बीजारोपण किया ‌ मुख्य वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री श्रवण गर्ग ने कहा कि सप्रे जी की पत्रकारिता ने छत्तीसगढ़ और हिंदी पत्रकारिता को शालीनता, निष्पक्षता और भाषा के संस्कार दिए। उन्होंने आज की हिंदी पत्रकारिता के ध्रुवीकरण पर चिंता जताई और कहा कि हिंदी पत्रकारिता का लोकतंत्र पूरे भारत का लोकतंत्र है। बीते वर्षों में हिंदी पत्रकारिता की निष्पक्षता और सत्यता संदेह के दायरे में है।‌पत्रकारिता से जनता का विश्वास उठ रहा है। सप्रे जी की पत्रकारिता आज की हिंदी पत्रकारिता को रास्ता दिखाती है। वेबिनार में नार्वे के हिंदी पत्रकार श्री शरद आलोक, दिल्ली के डा नारायण कुमार और कोलकाता वागर्थ की डां कुसुम खेमानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वेबिनार में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार और वरिष्ठ पत्रकार श्री रुचिर गर्ग भी उपस्थित थे।अध्यक्षता करते हुए पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ केशरी लाल वर्मा ने कहा कि पत्रकारों की आज की चिंता हिंदी को बचाने की चिंता है। सूचना और संप्रेषण पर निष्पक्षता का संकट है।
यह वेबिनार गूगल मीट पर हो रहा है जिसे यू ट्यूब पर भी देखा जा‌ रहा है। दूसरे दिन हिंदी नवजागरण से लेकर उत्तर आधुनिक युग के सफर पर विमर्श होगा। अंत में डॉ सुधीर शर्मा ने आभार व्यक्त किया

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