बीजापुर। राज्य शासन की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना नरवा-गरवा, घुरवा एवं बाड़ी के तहत जिले में नरवा विकास कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे भू-संरक्षण एवं जलसंवर्धन को बढ़ावा मिला है। इसी कड़ी में बीजापुर सामान्य वनमंडल अंतर्गत मद्देड़ वन परिक्षेत्र में कैम्पा मद से तुनकीवागु नाला का नरवा विकास हेतु चयन कर उपचार कार्य किया गया है। जिसके तहत करीब 1212 हेक्टेयर कैचमेंट एरिया में भू-संरक्षण और जलसंवर्धन संरचनाओं को बनाया गया है। जिसमें तुनकीवागु नाला पर 15 गेबियन स्ट्रक्चर सहित पूरे क्षेत्र मे स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च, बोल्डर चेक डेम, लूज बोल्डर चेक डेम सहित कन्टूर स्टोन बंड एवं चेक डेम निर्मित किये गये हैं। इन सभी भू-संरक्षण एवं जल संवर्धन संरचनाओं से वनाच्छादित ईलाके में जहां पानी रूकने के फलस्वरूप वॉटर रिचार्ज से भू-जल स्तर में वृद्धि होगी। वहीं भूमि कटाव के रूकने से भू-संरक्षण सुनिश्चित होगी। अब इस क्षेत्र में निर्मित सभी एसीटी अर्थात स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च में काली मूसली रोपित किये गये हैं। इसके साथ ही स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च में लेमनग्रास लगाये जायेंगे। वहीं हर दो स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च के बीच में सीताफल के पौधे रोपित किये जायेंगे। जिससे भू-संरक्षण को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। नरवा विकास के बारे में डीएफओ श्री अशोक पटेल ने बताया कि शासन की मंशानुरूप भू-संरक्षण एवं जलसंवर्धन को बढ़ावा देने वन क्षेत्र में स्थित नालों का उपचार कार्य किया जा रहा है। इस ओर स्थानीय ग्रामीणों में जागरूकता लाकर उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होने बताया कि नाले में गेबियन संरचना से बारिश का पर्याप्त पानी रूक जाता है और भू-क्षरण नहीं होता है। यह वाटर रिचार्ज का अच्छा विकल्प है, जिससे ग्राउण्ड वॉटर लेबल में आशातीत वृद्धि होगी। इसी तरह स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च, बोल्डर चेकडेम, लूज बोल्डर चेक डेम, कन्टूर स्टोन बंड, चेक डेम से भूमि कटाव को रोकने सहित वाटर रिचार्ज को बढ़ावा मिलता है। उन्होने स्ट्रेगर्ड कन्टूर ट्रेन्च में लेमनग्रास रोपित कार्य के जरिये स्थानीय ग्रामीणों को अतिरिक्त आय से जोड़ने पर बल देते हुए बताया कि लेमनग्रास की खरीदी लघु वनोपज संघ के माध्यम से की जायेगी। तुनकीवागु नरवा विकास कार्य से इस वनाच्छादित ईलाके में सकारात्मक परिणाम दिखायी देने लगा है। इस बारे में क्षेत्र के पावरेल एवं कोंगूपल्ली के निवासी पवन दुब्बा, बिचेम यालम, चापा लक्ष्मैया, चापा कन्हैया, गोटे राजाराम, एंजा कृष्णा, मिच्चा समैया आदि ग्रामीणों ने बताया कि विभिन्न संरचनाओं के निर्माण से अब भूमि कटाव रूका है और बारिश का पानी इन संरचनाओं में ठहरने से भू-जल स्तर में सुधार होने की संभावना है। वन विभाग के मैदानी अधिकारी रेंज आफिसर श्री सच्चिदानंद यादव और परिक्षेत्र सहायक श्री नक्का सुरेश ने बताया कि उक्त नरवा विकास कार्य को पूरी तरह तकनीकी मापदण्डों के अनुरूप करने के फलस्वरूप अब देख-रेख एवं रख-रखाव पर अधिक ध्यान दी जा रही है। जिससे आगामी दिनों में बेहतर परिणाम मिलेगा।
कैचमेंट एरिया में भू-संरक्षण एवं जलसंवर्धन संरचनाओं के जरिये किया नरवा विकास
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