रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य राष्ट्रीय मासिक पत्रिका एवं छत्तीसगढ़ राज्य न्यूज पोर्टल के संपादक चन्द्रभूषण वर्मा एवं फुरमानुक देवी देऊरगांव मंदिर के पंडा अदैृत चौबे ने आज त्रिपुर सुंदरी राज राजेश्वरी मंदिर श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में आज पहुँच कर ब्रम्हचारी जी इंदुभावन्द महराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किये। इस दौरान ब्रह्मचारी डॉक्टर इन्दुभवानन्द जी महाराज ने श्री चौबे और श्री वर्मा के मन में उठ रहे आध्यात्म एवं गुरु संबंधी प्रश्नों का उत्तर भी दिया। उन्होंने कहा कि गुरु में मनुष्य बुद्धि नहीं रखना चाहिए जो व्यक्ति गुरु को मनुष्य समझता है, मंत्र को अक्षर समझता है, और देवता को पाषण समझता है उसका शीघ्र विनाश हो जाता है। उसकी समस्त उपासना व्यर्थ हो जाती है। अत: गुरु में मनुष्य बुद्धि नहीं रखना चाहिए। संसार में अनेक प्रकार के गुरु मिलेंगे किंतु जो गुरु तत्वज्ञान करा दें ,परमात्मा से मिलन करा दें वही वास्तव में गुरु होता है उसी गुरु की शरण में जाना चाहिए। उन्होंने गुरु की उपमा शंकर जी से देते हुए बताया कि गुरु ज्ञान स्वरूप होते हैं यदि गुरु का आश्रय लिया जाएगा तो लाख दोष होने पर भी गुरु शरणागत आए हुए शिष्य की रक्षा करता है। जैसे चंद्रमा में अनेक दोष होने पर भी जब भगवान शंकर उसको स्वीकार कर लेते हैं तब सारे संसार के लोग उसकी वंदना करने लगते हैं। वैसे ही यदि गुरु व्यक्ति को अंगीकार कर ले तो उसका जीवन वास्तव में सार्थक हो जाता है। संसार में तीन चीजें दुर्लभ होती है एक तो मनुष्य का जन्म, दूसरा मुक्त होने की इच्छा और, तीसरा योग गुरु की प्राप्ति। यदि योग गुरु की प्राप्ति हो गई तो जीवन वास्तव में सार्थक हो जाता है।
छत्तीसगढ़ राज्य मासिक पत्रिका एवं छत्तीसगढ़ राज्य न्यूज पोर्टल के संपादक चन्द्रभूषण वर्मा एवं फुरमानुक देवी देऊरगांव मंदिर के पंडा अदैृत चौबे पहुंचे त्रिपुर सुंदरी राज राजेश्वरी मंदिर, ब्रम्हचारी जी इंदुभावन्द महराज जी से लिया आशीर्वाद
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