जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के द्वारा स्थापित शंकराचार्य आश्रम में भगवान शिव का श्रावण मास के पुनीत पर्व पर प्रतिदिन रुद्राभिषेक किया जा रहा है विभिन्न सामग्रियों से भगवान शिव का श्रृंगार भी किया जा रहा है आश्रम के प्रभारी डॉ इंदुभवानन्दजी महाराज ने बताया कि रुद्री पाठ के श्रवण करने मात्र से व्यक्ति समस्त पापों से मुक्त हो जाता है ।सुरा पान, ब्रह्म हत्या, सोना चोरी आदि महा पापों से भी मुक्ति प्राप्त होती है परमहंसोंको भी सदा सर्वदा कम से कम एक बार रुद्राभिषेक के मंत्रों का श्रवण करना चाहिए, रूद्र पाठ में भगवान शंकर के शगुन व निर्गुण दोनों स्वरूपों का वर्णन किया गया है अतः इससे ज्ञान की प्राप्ति के साथ साथ भवसागर का नाश हो जाता है।तथा समस्त प्रकार की सिद्धियां व्यक्ति को प्राप्त हो जाती हैं सभी प्रकार के दुख और भय से भी निवृत्ति हो जाती है।अतः व्यक्ति को श्रावण मास में एक बार रूद्र पाठ के मंत्रों का श्रवण अवश्य करना चाहिए। जिसने रूद्र पाठ के मंत्रों का श्रवण किया है अथवा रुद्राभिषेक किया है अथवा रुद्राभिषेक के जल से जिसका मार्जन किया गया है उसे वन औषधि पर्वत जल व सुंदर वृक्षों से युक्त पृथ्वी दान करने का पुण्य प्राप्त होता है, भगवान शंकर अत्यंत कृपालु हैं वह जल मात्र से ही संतुष्ट हो जाते। प्रलय का अवसान होने पर पुनः सृष्टि के प्रारंभ के पूर्व जब परम ब्रह्म परमात्मा सृष्टि करने के लिए उन्मुख होते हैं तब वे परात्पर सदाशिव कहलाते हैं वही सृष्टि के मूल कारण हैं मनुस्मृति में उनको स्वयंभू कहा गया है।आज शंकराचार्य आश्रम में भगवान सिद्धेश्वर का महाभिषेक करने के बाद फलों से वह फूलों से विशेष शृंगार किया गया। कोरोनावायरस के नियमों का पालन करते हुए भक्तों ने दर्शन किया।

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