राजनांदगांव। मलेरिया उन्मूलन के लिए जिले के साथ ही जिले की सीमा से सटे हुए क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर काम शुरू किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की सहभागिता से संवेदनशील क्षेत्र के गांवों में साझा अभियान शुरू किया गया है, जो 21 अगस्त तक चलाया जाएगा। मलेरिया उन्मूलन अभियान के अंतर्गत मलेरिया के कारण, लक्षण तथा इससे बचाव व नियंत्रण की व्यापक जानकारी देकर लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही मलेरिया पीड़ितों की पहचान करने के लिए डोर-टू डोर सर्वे किया जा रहा है।
इससे पहले राजनांदगांव जिला मुख्यालय में कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा के मुख्य आतिथ्य में अंतर्राज्यीय मलेरिया नियंत्रण कार्यशाला का आयोजन किया गया गया था। कार्यशाला में राजनादगांव के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी के साथ ही पड़ोसी जिले कबीरधाम से सीएमएचओ डॉ. एसके मंडलए बालोद से डॉ. जेपी मेश्राम, शहीद अस्पताल दल्लीराजहरा से डॉ. जेना, बालाघाट से डॉ. मनोज पाण्डेय, गढ़चिरोली से मलेरिया अधिकारी डॉ. मोदक और गोंदिया से डॉ. नितिन कापसे प्रमुखता से शामिल हुए थे। वहीं जिले के समस्त खंड चिकित्सा अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी तथा स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय संचालक डॉ. केआर काम्बले और राज्य स्तर से राज्य मलेरिया अधिकारी एवं संचालनालय के उच्च अधिकारी ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। कार्यशाला में मलेरिया उन्मूलन के लिए आवश्यक उपाय तथा माध्यमों को लेकर चर्चा की गई थी, जिसके अनुरुप अब जमीनी स्तर पर काम शुरू किया गया है। राजनांदगांव जिला के साथ ही सीमावर्ती जिला बालोद, दुर्ग, कबीरधाम, कांकेर (छत्तीसगढ़), बालाघाट (मध्यप्रदेश) और गढ़चिरौली व गोंदिया (महाराष्ट्र) के गांवों में 16 अगस्त से मलेरिया जागरुकता अभियान शुरू किया गया है, जो 21 अगस्त तक चलाया जाएगा। जागरुकता अभियान के अंतर्गत विभिन्न प्रचार माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि, मलेरिया एक प्रकार का बुखार है जो ठंड या सर्दी लगकर आता है। मलेरिया रोगी को रोजाना या एक दिन छोड़ कर तेज बुखार आता है। मलेरिया मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से शुरू होता है जो इस परजीवी को शरीर में छोड़ता है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया, राजनांदगांव जिले की सीमाएं बालोद, दुर्ग, कांकेर, कबीरधाम, मध्य प्रदेश के बालाघाट एवं महाराष्ट्र के गढ़चिरोली व गोंदिया जिले को भी छूती हैं। इन सभी जिलों की पहचान मलेरिया प्रभावित जिलों की रही है और इस क्षेत्र के सभी जिलों के निवासी वृहद रूप से मलेरिया से प्रभावित होकर संकट में आते रहे हैं। इसीलिए इन क्षेत्रों में जागरुकता अभियान के रूप में एक नवीन पहल की जा रही है। इन समस्त संवेदनशील जिलों के अनुभवी अधिकारियों के कार्य अनुभव से एक नई रणनीति बनाकर सभी की सहभागिता से इस पूरे क्षेत्र में मलेरिया उन्मूलन का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा, मलेरिया उन्मूलन के लिए शुरू किया गया जागरुकता अभियान जिलों में मलेरिया प्रसार की दर को नियंत्रित करने में काफी हद तक कारगर साबित हो सकता है। अभियान के तहत लोगों को मलेरिया से बचाव के तरीके व इस पर नियंत्रण के उपाय बताए जा रहे हैं।
मलेरिया रोकथाम के उपाय
० घर के आसपास साफ सफाई रखें।
० पुराने बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
० पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
० घर के अंदर डीडीटी जैसी कीटनाशकों का छिडकाव करवाएंए जिससे मच्छरों को खत्म किया जा सके।
० आमतौर पर यह मच्छर साफ पानी में जल्दी पनपता है। इसलिए सप्ताह में एक बार पानी से भरी टंकियां, मटके आदि को खाली करके सुखाएं।
० पेयजल स्रोतों में टेमोफोस नामक दवाई समय-समय पर डलवाते रहें।
० खिड़कियों, दरवाजों मे जालियां लगवाने से भी मच्छर नहीं आते। मच्छरदानी इस्?तेमाल करें।
मलेरिया के लक्षण
० अचानक ठंड लगना।
० सर्दी लगने के बाद गर्मी लगकर तेज बुखार आना।
० पसीना आकर बुखार कम होना व कमजोरी महसूस होना।
० सिरदर्द।
० शरीर में दर्द।
० जी मिचलाना।
० उल्टी।

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