हर व्यक्ति के जीवन में गुरु का एक विशेष स्थान होता है। सांसरिक जीवन में जब व्यक्ति उलझ जाता है और उसे कोई रास्ता नजर ही नहीं आता है तब गुरु ही उसे सही राह दिखाता है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुओं का सम्मान किया जाता है। भावी जीवन का निर्माण गुरू द्वारा ही होता है। वास्तव में गुरु की महिमा का पूरा वर्णन कोई नहीं कर सकता। गुरु की महिमा तो भगवान् से भी कहीं अधिक है शास्त्रों में गुरु का महत्व बहुत ऊंचा है। गुरु की कृपा के बिना भगवान् की प्राप्ति असंभव है। गुरु के मन में सदैव ही यह विचार होता है कि उसका शिष्य सर्वश्रेष्ठ हो और उसके गुणों की सर्वसमाज में पूजा हो। जीवन में गुरू के महत्व का वर्णन कबीर दास जी ने अपने दोहों में पूरी आत्मीयता से किया है- आज के आधुनिक युग में भी गुरु की महत्ता में जरा भी कमी नहीं आयी है। एक बेहतर भविष्य के निर्माण हेतु आज भी गुरु का विशेष योगदान आवश्यक होता है। गुरु के प्रति श्रद्धा व समर्पण दर्शित करने हेतु गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गुरु का पूजन करने से गुरु की दीक्षा का पूरा फल उनके शिष्यों को मिलता है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अध्यात्मिक गुरु श्री अरुण चौबे जी महाराज के श्रीचरणों में सादर प्रणाम करता हूं। इसके साथ ही सभी गुरुभाईयों एवं गुरु बहनों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई प्रेषित करता हूं।
चंद्रभूषण वर्मा

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