रायपुर । “हमारे नायक” के बैनर तले एक हजार ब्लॉग का पूरा होना इस बात का प्रमाण है कि जिन योजनाओं की कमान हमारे शिक्षक स्वंय संभालते हैं। वे लंबी अवधि का कार्यकाल तय करती हैं और अपना प्रभाव जमीनी स्तर तक लंबे समय के लिए छोड़ जाते हैं। जब कभी भी इतिहास में स्कूलों के लॉकडाउन को याद किया जाएगा तब निश्चित रूप से “हमारे नायक” एवं उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को आवश्यक याद किया जाएगा।
बस्तर के राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक डॉ. प्रमोद कुमार शुक्ल ने बताया कि ‘हमारे नायक’ स्तंभ की शुरुआत पढ़ई तुंहर दुआर पोर्टल में शिक्षा के नायक को एक स्थान देने के लिए की गई थी। यह उन शिक्षकों और छात्रों की सफलता की कहानी बताता है, जिन्होंने पीटीडी पहल में सफलतापूर्वक भाग लिया है। इस स्तंभ में, हीरो के रूप में पोजिशनिंग शिक्षक देश में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम बन गया है। स्तंभ के एक ब्लॉग लेखक के रूप में हमारे नायक मैं चयनित व्यक्ति की सभी अच्छी पहल और प्रेरणादायक कार्यों का उल्लेख करने का प्रयास करता हूं। यह मुझे ताकत देता है, मैं एक ब्लॉग लेखक के रूप में हमारे नायक कॉलम से जुड़कर बहुत खुश हूं। ”
श्रीमती टी. विजयलक्ष्मी, व्याख्याता, दंतेवाडा – ष्सच कहूँ तो लेखन कार्य से मेरा दूर-दूर तक कोई नाता नही था। सभी ब्लॉग लेखक साथियों द्वारा लिखित ब्लाग्स को पढ़कर मेरी भाषा एवं शैली में बहुत परिवर्तन आया। विशेष रूप से मैने एक श्विशेष आवश्यकताश्  वाली बच्ची का ब्लॉग लिखा है। एक ओर उसकी सीखने की तीव्र इच्छा शक्ति ने प्रभावित किया तो दूसरी ओर उसके माता-पिता के दर्द को नजदीक से महसूस किया। मुझे ब्लॉग लेखन कार्य के साथ ष्टाइम मैनेजमेंटश्  भी सीखने को मिला। पहली बार महसूस हुआ कि ष् समस्याओं को कमज़ोरी नहीं बल्कि अवसर की तरह उपयोग करना चाहिए। और उन समस्याओं को ही आत्मबल बनाकर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। दुर्ग के ब्लॉग लेखक श्री विवेक धुर्वे ने बताया कि कोरोना महामारी के इस सफर में छत्तीसगढ़ शासन की योजना ‘पढ़ई तुंहर दुआर’ सीजी स्कूल डॉट इन पोर्टल के हमारे नायक के 1000 ब्लॉग पूर्ण होने पर बहुत अच्छा अनुभव रहा। इसमें मेरे द्वारा कुल 46 ब्लॉग लिखे गए और 2 वर्कशीट में काम किया और दुर्ग संभाग समन्वयक बनने के बाद 2 वर्कशीट का चयन करके शिक्षको बच्चों के नए नए नवाचार से अवगत हुआ। छत्तीसगढ़ शासन की इस योजना पढई तुंहर दुआर में  शिक्षकों और विद्यार्थियों के अंदर के नवाचारों से सबको परिचित करवाने का ये बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है ‘हमारे नायक’। औरों के अनुभव सुनकर, अपने अनुभव औरों के सामने रखकर, और अनुभवों की समानता देखकर कुछ ठोस निष्कर्षों पर भी पहुंचना संभव होता है। यह भी समझ बनती है कि सिखाने की प्रक्रिया एक निरन्तर प्रयोग है, जो कभी तो सफल हो जाता है और कभी नहीं। और प्रयोग का सफल हो जाना भी उतना ही सही है जितना उसका विफल रहना। क्योंकि दोनों परिस्थितियों में बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
दुर्ग की श्रीमती रश्मि नामदेव ने कहा कि जब ब्लॉग लेखन हेतु गूगल फॉर्म आया तो घर में खाली बैठे उत्सुकतावश मैंने फॉर्म भर दिया। मन में कहीं हिचकिचाहट थी, क्या मैं लिख पाउंगी ? किंतु जब लिखना प्रारंभ किया, तो मैंने महसूस किया कि, मेरी लेखन शैली में उत्तरोत्तर प्रगति हुई। जब हमारे नायक से हम संपर्क करते थे तब हमें उनके बारे में उनकी कार्यशैली के बारे में विस्तृत रूप से जानने का मौका मिला। मुझे यह कहते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि हर नायक से मैंने कुछ ना कुछ सीखा और हमारे नायक लिखने से मेरे स्वयं के एक शिक्षक के रूप में व्यक्तित्व में, कार्य शैली में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। बालोद के शिक्षक श्री श्रवण कुमार यादव ने बताया कि ब्लॉग लेखन के दौरान अनेकों स्वप्रेरित शिक्षा सारथियों से भी बातचीत कर उनके द्वारा निःस्वार्थ शिक्षा दान की प्रेरक पहल से रुबरू होने का मौका मिला। इसके अलावा जब विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग बच्चों के ऊपर ब्लॉग लेखन किया तो उन बच्चों के कार्यों  और सहभागिता को जानने के बाद यह महसूस हुआ कि वे सामान्य बच्चों से भी अधिक संवेदनशील होते है। 

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