दुर्ग। बायो फ्लाक्स और रिसर्कुलेटरी एक्वा सिस्टम जैसी नई तकनीकों ने मछली पालन के लिए उद्यमियों हेतु अपार संभावनाओं के द्वार खोल दिये हैं। इसका लाभ उठाना अब बेहद आसान है। कोई भी किसान मछली पालन के लिए ऐसे प्रोजेक्ट लगाना चाहे तो इसके लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान की सुविधा उपलब्ध है। यह बात कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने मत्स्यपालन से संबंधित वर्कशाप में कही। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने मछली पालन को कृषि का दर्जा दिया है तथा मछुवा कल्याण बोर्ड का गठन किया है। इन दो निर्णयों से मत्स्यपालकों के लिए आर्थिक तरक्की के बड़े रास्ते खुल गये हैं। स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन ने डीएमएफ के माध्यम से मत्स्यपालकों के लिए डबरी तथा इसमें मछली पालन के लिए बीज तथा जाल आदि देने की शुरूआत की है। कलेक्टर ने कहा कि मत्स्यपालन को कृषि का दर्जा मिलने से नई संभावनाएं खुली हैं। यह आर्थिक आय बढ़ाने का शानदार अवसर है जब सभी ओर से आधुनिक ईकाइयों की स्थापना के लिए सहयोग मिल रहा है। इस ओर मछली उत्पादकों को बढ़ना चाहिए। हर स्तर पर जिला प्रशासन द्वारा इसमें सहयोग दिया जाएगा। वर्क शाप में मछुवा कल्याण बोर्ड के सदस्य श्री विजय ढीमर, एनसीडीएस के संचालक श्री कैलाश कौशिक, जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक, उपसंचालक श्री सुदेश साहू, उपसंचालक श्रीमती सुधा दास सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
बायोफ्लाक्स और रिसर्कुलेटरी एक्वा सिस्टम- मछलीपालन की यह सबसे आधुनिक तकनीक है। इसमें छोटे से सेटअप में मछली पाली जाती है और थोड़ी सी जगह में कई गुना मछली का उत्पादन किया जा सकता है। यह रास्ता आम मछली पालकों के लिए भी सुलभ हो इसके लिए मत्स्य संपदा योजना आरंभ की गई है। इसमें अपना सेटअप स्थापित करने के लिए सामान्य श्रेणी के प्रतिभागियों के लिए 40 फीसदी तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा महिला वर्ग के लिए 60 फीसदी वित्त सहायता की सुविधा रखी गई है।
किसे मिल सकता है लाभ- इसका लाभ मछुवारे, मत्स्य उत्पादक, स्वसहायता समूह के लोग, मत्स्यपालन में सहकारिता से जुड़े लोग, मछली किसान उत्पादक संगठन ले सकते हैं। इसके लिए अधोसंरचना निर्माण हेतु सावधि ऋण की सुविधा भी है तथा नई ईकाइयों की स्थापना तथा वर्तमान ईकाइयो के विस्तारण हेतु इक्विटी निवेश ऋण की सुविधा भी है।
दुर्ग में मछली उत्पादकों के लिए बड़ी संभावनाएं- वर्कशाप में विशेषज्ञों ने बताया कि दुर्ग जिले में मछलीपालक किसानों के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। यहां का लोकल मार्केट स्थानीय जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता। बाहर से बड़े पैमाने पर मछली बाजार में आती है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से मछली उत्पादक किसान इस बड़े बाजार को प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही बायो फ्लाक्स और रिसर्कुलेटरी एक्वा सिस्टम जैसी ईकाइयों की वजह से बहुत कम जगह, लागत एवं कच्चे माल पर ही बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हो सकता है।
आधुनिक तरीके से मछली पालन के लिए सरकार का बड़ा कदम, सेटअप के लिए 60 प्रतिशत तक सब्सिडी
Previous Articleसस्ती जेनेरिक मेडिसिन लोगों में हो रही लोकप्रिय
Related Posts
chhattisgarhrajya.com
ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
Important Page
© 2025 Chhattisgarhrajya.com. All Rights Reserved.
