हे दु:ख भंजन, मारुति नंदन सुन लो मेरी पुकार, पवन सुत विनती बारंबार…भजनों से गुंजायमान वातारण के बीच तीन नवंबर को छोटी दीपावली पर कलियुग के एक मात्र जाग्रत देव संकटहर्ता हनुमान जी की जयंती मनाई जाएगी। मंदिरों के दर्शन के खास इंतजाम किए गए हैं। हनुमान सेतु मंदिर के कपाट दोपहर साथ दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। मंदिर के आचार्य चंद्रकांत द्विवेदी ने बताया कि छोटी दीपावली को मां अंजना के कोख से हनुमान जी का जन्म हुआ था। देवादिदेव महादेव के अंश होने के साथ ही शनिदेव व वरुण देव की विशेष कृपा भी बजरंग बली के दर्शन पूजन से मिलती है। प्रतिबंधों के बीच दर्शन होंगे। अलीगंज के पुराने व नए हनुमान मंदिर में भी शारीरिक दूरी के साथ दर्शन पूजन का इंतजाम होगा। पक्कापुल स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के पुजारी श्रीराम सिंह ने बताया कि बजरंग बली को सुबह भोग लगेगा और प्रसाद वितरण होगा। बीरबल साहनी मार्ग स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में विशेष आराधना होगी। पुजारी पवन मिश्रा ने बताया कि श्रद्धालु शारीरिक दूरी के साथ दर्शन कर सकेंगे। आलमबाग के मौनी बाबा मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शुक्ला ने बताया कि दर्शन की व्यवस्था होगी। सुंदरकांड के साथ ही कोरोना मुक्ति की कामना की जाएगी। आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि हनुमान जयंती पर शाम को दर्शन करना श्रेयस्कर होगा। शास्त्रों के मुताबिक हनुमान जयंती के दूसरे दिन सूर्योदय के पहले हनुमत दर्शन उत्तम होता है। शहर के अन्य हनुमान मंदिरों में भी पूजन व दर्शन की तैयारियां पूरी हो गईं हैं। शाम से शुरू होगा चतुर्दशी का मान: तीन नवंबर को शाम को चतुर्दशी का मान शुरू होने के चलते घूरे पर एक दीपक जलाया जाएगा। आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि घर की सफाई के अलावा द्वार पर गोधूलि बेला या 4:30 बजे से सूर्यास्त के बीच पूजन कर द्वार पर चतुर्मुखी चार बाती वाला दीपक जलाना उत्तम रहेगा। मान्यता है दरिद्रता के दूर होने के बाद ही मां लक्ष्मी का वास होता है।
हनुमान जयंती कल, विशेष फल की प्राप्ति के लिए इस समय करें पूजन-अर्चन
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