जैसे गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े
पांच दिवसीय दीप पर्व दीपावली के अंतिम पांचवे दिन आज देशभर में भाईदूज का पर्व मनाया जा रहा है। इस अवसर पर बहनें अपने भाईयों के मस्तक पर तिलक लगाया। जहां एक तरफ भाईयों का मस्तक बहनों के तिलक से सज गया तो वहीं दूसरी तरफ बहनों के चेहरे पर मुस्कान छाई रही। हिंदू धर्म में भाई दूज के पर्व का विशेष महत्व है। राखी के त्योहार की ही तरह भाई दूज पर भी बहनें भाइयों को तिलक करती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली पर्व का समापन भाई दूज के दिन होता है। इस दिन बहने भाइयों की लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं, भाई भी अपना प्रेम दिखाते हुए बहनों को उपहार देते हैं। इस दिन भाई-बहनों के घर जाते हैं। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।
भाई दूज को कहते हैं यम द्वितीया
भाई दूज के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है। इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं. भाई दूज पर बहनें भाई की लंबी आयु की कामना करते हुए उन्हें तिलक करती हैं। वहीं, इसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है।
भाई दूज से जुड़ी हैं ये मान्यताएं
भाई दूज से जुड़ी कुछ मान्यताएं है। इस दिन बहनें भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाकर उसके ऊपर सिन्दूर, कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि रखती हैं। और हाथों पर पानी डालते हुए कहती हैं, जैसे गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े। इतना ही नहीं, इस दिन शाम के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं। भाई दूज के दिन आसमान में चील उड़ती दिखना भी शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भाई की आयु के लिए बहनों ने जो दुआ मांगी है उसे यमराज ने सुन लिया है या फिर ये भी कहा जाता है कि बहनों के संदेश को चील यमराज को सुनाएगी।
