75 वर्ष की मोहन देवी। उम्र का सारा बोझ लाठियों पर था, क्योंकि तीन बेटे होने के बावजूद वह तन्हा थी। अलग रहती थीं। बुढ़ापा दूसरे के घर में कट रहा था, वह भी गांव के इमामउद्दीन के रहमोकरम पर। मोहन देवी को उम्मीद थी कि यदि मौत आई तो बेटे शव को कांधा देकर अंतिम संस्कार जरूर करेंगे। मोहन देवी की शुक्रवार को मौत हो गई। बेटों का कांधा नहीं मिला। हैरान व झकझोर देने वाला दृश्य यह रहा कि बेटों ने शव लेने से ही इनकार कर दिया। मजबूरन पुलिस की पंचायत के बाद ग्राम प्रधान ने शव का अंतिम संस्कार कराया। मोहन देवी क्यों इमामउद्दीन के घर में रहती थी, वृद्धा की मौत के साथ यह मसला भी खत्म हो चुका था, लेकिन बेटों ने ममता का तिरस्कार कर नई बहस को जरूर जन्म दे दिया है। कड़ा धाम कोतवाली के गिरधरपुर गढ़ी गांव की मोहन देवी (75) गांव के ही इमामउद्दीन के घर पर सालों से रहती थी। तीन बेटे हैं, लेकिन सेवादारी न होने की वजह से वह बेटों के साथ नहीं रहती थी। वर्ष 2019 में मोहन देवी की भूमि को इमामउद्दीन ने गांव दारानगर के राजाराम को रजिस्ट्री करवा दी थी। इससे बेटे नाराज रहते थे। शुक्रवार की दोपहर को मोहन देवी की मौत हो गई। इमामउद्दीन शव लेकर बेटों के पास पहुंचे और अंतिम संस्कार करने की बात कही। बेटों ने इसका विरोध किया। साथ ही गंभीर आरोप लगाते हुए शव लेने से इनकार कर दिया। इस दौरान बेटों ने हंगामा किया। सूचना पर कड़ा धाम की पुलिस पहुंची। पुलिस ने मामले के निस्तारण के लिए ग्राम प्रधान जगदीश यादव को बुलाया। ग्राम प्रधान बेटों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़े रहे। इसके बाद ग्राम प्रधान ने छोटा टिलवा में गंगा किनारे शव का अंतिम संस्कार करवाया। अंतिम संस्कार होने के बाद बड़े बेटे शिवगुलाम ने इमामउद्दीन के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी और बताया कि गलत ढंग से उसकी मां से जमीन बिकवाई गई थी। फर्जी बैनामा कराने का आरोप लगाया है। मौत पर भी सवाल उठाए हैं। पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

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