मध्यप्रदेश की भांति छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी अशासकीय संकल्प पारित करने का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह

रायपुर। मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम2000 की धारा 49(6) की बन्धनकारी नियमों से परेशान होकर दोनों राज्य के पेन्शनर इसे विलोपित करने की मांग को लेकर आंदोलित है और दोनों राज्य के पेन्शनर संघो की संयुक्त बैठक में 5 दिसम्बर को जबलपुर में लिये गये निर्णय के तहत 03 जनवरी 22 को नववर्ष के शुरुवात में ही दोनों राज्यों के मंत्रालय के समक्ष भोपाल और रायपुर में जंगी प्रदर्शन करने जा रहे हैं। इसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेन्शनर फेडरेशन के प्रतिनिधि मंडल को 28 दिसम्बर को चर्चा में वित्त सचिव अमेर मंगई डी. ने अवगत कराया कि धारा 49(6) में आर्थिक भुगतानों के लिये दोनों राज्यों के बीच आपसी सहमति लेने का कोई उल्लेख नहीं है, इसलिए इस मांग का कोई अर्थ नहीं है। पेन्शनर प्रतिनिधि मंडल द्वारा वित्त सचिव को अवगत कराने पर कि पेन्शनर सँगठन भी यही बात कहते आ रहें है कि धारा 49 में सहमति का प्रावधान नहीं है तो फिर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा धारा 49 का हवाला देकर विगत 21 वर्षों से महँगाई राहत अथवा अन्य आर्थिक भुगतानों के लिये मध्यप्रदेश शासन से सहमति क्यों ली जाती है।इस पर वित्त सचिव का कहना था कि संवैधानिक बाध्यता के कारण दोनों राज्य निर्धारित अनुपात में बजट वहन करते हैं। इसलिए आपसी सहमति जरूरी हैं। वित्त सचिव की इस विरोधाभाषी कथन से छत्तीसगढ़ के पेन्शनर हतप्रभ होकर जब उनसे बहस करने लगे तो उन्होनें इसके समाधान पर अपनी असमर्थता व्यक्त करते हुए इसके लिये मुख्यमंत्री से मिलकर बात करने का सुझाव देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। जारी विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेन्शनर फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने बताया है कि वित्त सचिव का यह कहना कि धारा 49 में पेंशनरो के आर्थिक भुगतानों में दोनों राज्य के बीच सहमति का कोई प्रावधान नहीं है परन्तु 21 वर्षो से ली जा रही सहमति पर सवैधानिक मजबूरी बताना और उनका इस पर समाधान के लिये मुख्यमंत्री से मिलने का सुझाव समझ से परे हैं। जारी विज्ञप्ति में पेन्शनर 5 संगठनों के नेता क्रमश: वीरेन्द्र नामदेव, डॉ डी पी मनहर, गंगा प्रसाद साहू,आर पी शर्मा,जे पी मिश्रा, ओ पी भट्ट ने बताया है कि विगत 24 दिसम्बर 21 को मध्यप्रदेश विधानसभा भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा49(6) को विलोपित करने दोनों राज्यो के बीच आर्थिक भुगतानों में आपसी सहमति की बाध्यता को समाप्त करने हेतु विधायक योगेन्द्र सिंह सिसोदिया द्वारा प्रस्तुत अशासकीय संकल्प पारित किया गया है ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी अशासकीय संकल्प पारित किये जाने का आग्रह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से किया है।

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