रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना के तहत नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी को सहेजने का सार्थक परिणाम दिखने लगा है। छत्तीसगढ़ राज्य की इन चारों चिन्हारियों के सरंक्षण और संवर्धन के ग्रामीण जन-जीवन में खुशहाली का एक नया दौर शुरू हुआ है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नयी गति मिली है। सुराजी गांव योजना के तहत गांव-गांव में बने गौठान पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के साथ ही ग्रामीणों की आजीविका के केन्द्र के रूप में स्थापित हुए हैं। नरवा (नाला) के उपचार से वर्षा जल को सहेजने का काम शुरू होने से गांवों में भू-जल की स्थिति में सुधार होने के साथ ही नालों में साल भर पानी रूकने लगा है। इसकी वजह से नाले के किनारे के खेतों में वर्षभर नमी बने रहने तथा सिंचाई की सुविधा मिलने से किसान अब खाद्यान्न वाली फसलों के साथ ही साग-सब्जी की खेती करने लगे हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय होने लगी है। नरवा के उपचार कार्य से ग्रामीणों को जहां एक ओर बड़े पैमाने पर रोजगार मिला है, वहीं दूसरी ओर बहते पानी को रोकने के उपायों से गांवों में हरियाली और निस्तार की सुविधा भी सृजित हुई है। रायगढ़ जिले के जीरानाला में सिर्फ बरसात के दिनों में ही पानी का बहाव देखने को मिलता था। इस नाले का उपचार कराने के बाद यह जीवंत हो उठा है। नाले में जगह-जगह पानी संग्रहित दिखाई देने लगा है। बरमकेला विकासखण्ड के डूमरपाली गांव में बहने वाले जीरानाले में महात्मा गांधी नरेगा से सात नग बोल्डर चेक डेम का निर्माण करवाया गया है। साल 2019 में बरसात के बाद, यहां रूके पानी से आसपास की जमीन हरी-भरी हो गई। गांव के लगभग 60 से 70 किसानों ने नाले से लगे अपने खेतों में धान के अलावा सब्जियों का भरपूर उत्पादन लिया, इससे उन्हें अच्छी-खासी आमदनी हुई। जीरानाला में बने छोटे-छोटे बोल्डर चेक डेमों ने किसानों की जिंदगी को खुशहाल कर दिया है। डूमरपाली ग्राम पंचायत अंतर्गत खेतों में दिखने वाली हरियाली और खुशहाली के पीछे शासन के द्वारा नरवा संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयास और ग्रामीणों की मेहनत है। साल 2019-20 में इस गांव में बहने वाले जीरानाले में भूमि क्षरण को रोकने एवं संग्रहित जल के जरिये भू-जल भंडारण के उद्देश्य से महात्मा गांधी नरेगा के तहत जल संवर्धन का कार्य कराया था। इसके अंतर्गत 77 हजार 136 रुपये की लागत से नाले पर अलग-अलग स्थानों में 7 बोल्डर चेक डेम का निर्माण कराया गया। डूमरपाली गांव के जीरानाले में महात्मा गांधी नरेगा योजना से हुए इस जल संवर्धन के काम ने बड़ा असर डाला है। इसमें 33 ग्रामीण परिवारों को सीधे रोजगार मिला। नाले में अलग-अलग चिन्हांकित जगहों पर बोल्डर चेक डेम बनाने से नाले में अधिक समय तक पानी रूका, जिसका उपयोग नाले से लगी कृषि भूमि के किसानों ने अपनी खेती-बाड़ी में किया। इस कार्य से गांव 62 किसानों की लगभग 75 एकड़ कृषि भूमि सिंचित हुई है। नाला उपचार के बाद इसके किनारे स्थित 12 नलकूपों के जल स्तर में वृद्धि हुई है। बोल्डर चेक डेम बनने के पूर्व मई-जून महीने में इन नल कूप में जल स्तर 400 से 500 फीट नीचे चला जाता था, जो आज 150 से 250 फिट पर आ गया है। भू-जल स्तर बढने से आस-पास हरियाली भी बढ़ गई है। जीरानाले में हुये जल संवर्धन के कार्य से लाभान्वित किसान प्रफुल्ल भोये बताते है कि नाले से लगकर उनकी 2.1 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें उन्होंने नाले के पानी से बरबट्टी, बैंगन, करेला, मिर्च और तोरई सब्जियों की पैदावार ली। इस साल, जिसमें लॉकडाउन की अवधि भी शामिल है, इन सब्जियों को बेचने से उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हुई। प्रफुल्ल के खेत के नजदीक प्रमोद भोये, रिबे साहू, नातो कुमार खमारी और हेमराज भोई भी ऐसे ही किसान है, जिन्होंने नाले से लगी अपनी कृषि भूमि पर इस साल सब्जियों का उत्पादन लेकर लाभ कमाया। नरवा संरक्षण से किसानों के जीवन में खुशहाली का एक नया दौर शुरू हो गया है।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
Exit mobile version