नए साल के दूसरे पखवारे में शुक्रवार को खरमास खत्म होने के साथ 15 जनवरी से मकर संक्रांति और प्रदोष के साथ विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो गए हैं। विवाह मुहूर्त सिर्फ फरवरी महीने तक ही हैं। मार्च में एक भी मुहूर्त नहीं है। इसके बाद फिर अप्रैल के दूसरे पखवारे में 15 तारीख से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे, जो जुलाई तक रहेंगे। 28 फरवरी तक 44 दिन में कुल 21 दिन विवाह की शहनाई बजेंगी। जुलाई तक कुल 63 मुहूर्त के दिन होंगे। दूसरे महीने के पहले पखवारे तक तीज-त्योहारों की धूम रहेगी। इसमें मौनी अमावस्या, गुप्त नवरात्र, वसंत पंचमी सहित अन्य पर्व होंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते हुए खरमास खत्म हो चुका है। पुरोहितों के मुताबिक खरमास में सूर्य के धनु राशि में रहते बृहस्पति निस्तेज हो जाते हैं। इसलिए विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।

मार्च में गुरु-शुक्र के अस्त होने पर मुहूर्त नहीं
लखनऊ यूनिवर्सिटी के ज्योतिर्विज्ञान विभाग के प्रो़ अनिल कुमार पोरवाल ने बताया कि शुभ कार्यों के लिए बृहस्पति का प्रभावी होना जरूरी है। सूर्य के मकर राशि में पहुंचने पर मांगलिक कार्य, विवाह शुरू हो गए हैं। यज्ञोपवीत, नामकरण मुंडन, प्रतिष्ठान का उद‌्घाटन और गृह प्रवेश होंगे। फरवरी तक विवाह होंगे। मार्च में गुरु और शुक्र के अस्त रहने की वजह से विवाह मुहूर्त नहीं होंगे। विवाह के लिए दोनों ग्रहों का उदित होना जरूरी है। लेकिन धार्मिक अनुष्ठान व तीज-त्योहार होंगे।

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