रायपुर। विनाशकारी हथियारों के उत्पादन पर रोक लगे और इन्हें नष्ट कर समुद्र में फेंक दिया जाए, मसलन निःशस्त्रीकरण से ही हम विश्व शांति की कल्पना को साकार कर सकते हैं। विश्व में अशिक्षा, गरीबी, भूखमरी जैसी समस्याओं के समाधान की दिशा में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका सराहनीय है। यह बातें मैट्स यूनिवर्सिटी के महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्व शांति केंद्र, हिन्दी विभाग ने आयोजित वेबिनार में अतिथियों एवं विषय विशेषज्ञों ने कहीं।

मैट्स यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रेशमा अंसारी ने बताया कि मैट्स यूनिवर्सिटी ने ’विश्व शांति में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका’ विषय पर राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। वेबिनार के मुख्य अतिथि स्पाइल दर्पण ओस्लो, नार्वे के संपादक सुरेश चंद शुक्ल ’शरद आलोक’ ने संयुक्त राष्ट्र संघ के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत विभिन्न संगठनों विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संघ, खाद्य व कृषि संगठन, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संगठन आदि की विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने भारत से बाहर रहकर देश के प्रति लगाव और देशभक्ति का अनुपम उदाहरण भी प्रस्तुत किया। विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार, व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने जिस अवधारणा से कार्य शुरू किया उसमें पूरी तरह सफलता प्राप्त नहीं हुई है किन्तु विश्व में अशिक्षा, गरीबी, भूखमरी हटाने के जो प्रयास हें वे काफी बेहतर हैं। गिरीश पंकज ने कहा कि विश्व शांति के लिए हथियारविहीन विश्व की आवश्यकता है। देश के सभी राष्ट्र अपने-अपने हथियार समुद्र में फेंक दे और राष्ट्र के विकास के लिए कार्य करें। भारत यदि संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनता है तो विश्व शांति के लिए भारतीय प्रयास काफी कारगर साबित होंगे।

विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार एवं कल्याण महाविद्यालय भिलाई के हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा ने ’वसुदैव कुटुंबकम’ और ’सर्वे भवन्तु सुखीनः’ की भारतीय अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि हम वैदिक काल से लेकर आज तक यज्ञ या हवन करते हैं तो इन्हीं मंत्रों के साथ विश्व शांति की कामना करते हैं। भारत प्रारंभ से विश्व शांति का समर्थक रहा है। उन्होंने पं. जवाहरलाल नेहरू के पंचशील के सिद्धांतों को अपनाने के प्रति प्रेरित करते हुए कहा कि विश्व शांति में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्राध्यापक संदीप अवस्थी, अजमेर, राजस्थान ने विशिष्ट वक्ता के रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना से लेकर वर्तमान वैश्विक राजनीति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ भले ही विभिन्न देशों के बीच युद्ध या तनाव रोक पाने में विफल रहा हो किन्तु अशिक्षा, गरीबी, भूखमरी को मिटाने जैसे प्रयास सराहनीय है क्योंकि इससे आतंकवादियों के नये सदस्य नहीं बनेंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मैट्स विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.पी. यादव ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ पर भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने के लिए दबाव बनाना चाहिए। विश्व शांति के लिए पूरे विश्व को निःशस्त्रीकरण होना आवश्यक है और विश्व के सभी राष्ट्र हथियारों को नष्ट कर अपने विकास-कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें तो बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। प्रो. यादव ने कहा कि सभी देशों को अपने निःशस्त्रीकरण की दिशा में कदम उठाते हुए अपने रक्षा बजट को कम कर उन पैसों का उपयोग देश की भलाई के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत को निश्चित रूप से सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनाना चाहिए।

कुल 193 देशों में से कम से कम 10 प्रतिशत देशों को सुरक्षा परिषद का सदस्य बनाना चाहिए जिससे सुरक्षा से संबंधित कोई भी फैसले बिना किसी पक्षपात के लिये जा सकें। इसके पूर्व स्वागत भाषण देते हुए मैट्स यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रेशमा अंसारी ने विश्व शांति में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका विषय पर आयोजित वेेबिनार की विषय-वस्तु से अवगत कराया।

वेबिनार का संचालन हिन्दी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. सुनीता तिवारी ने किया। सह. प्राध्यापक डॉ. कमलेश गोगिया ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि निःशस्त्रीकरण के विचारों से एक नए विश्व की परिकल्पना ने वेबिनार के माध्यम से जन्म लिया है जो मुख्य वक्ता, विशिष्ट वक्ताओं तथा विषय विशेषज्ञों के माध्यम से उद्घाटित हुआ है। समसामयिक विषय पर आयोजित वेबिनार के सफल आयोजन पर मैट्स यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति गजराज पगारिया, महानिदेशक प्रियेश पगारिया, उपकुलपति डॉ. दीपिका ढांड, कुलसचिव गोकुलानंदा पंडा ने हर्ष व्यक्त कर इसे सराहनीय प्रयास बताया।

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